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विप में मनोनयन की सुगबुगाहट शुरू, 12 सीटों में BJP को भी मिलेगा बड़ा हिस्सा!

पटना : बिहार विधान परिषद की 75 में से 29 सीटें खाली हो गईं हैं। इनमें विधान सभा कोटे की 9 और शिक्षक—स्नातक कोटे की 8 और राज्यपाल कोटे से मनोनीत होने वाली 12 सीटें शामिल हैं। लॉकडाउन में 17 सीटों पर चुनाव तो स्थगित है लेकिन राज्यपाल कोटे से मनोनीत होने वाले 12 सदस्यों के मनोनयन को लेकर सुगबुगाहट शुरू हो गई है और आने वाले कुछ दिनों में इसे अंजाम दे दिया जाएगा। माना जा रहा है कि इस बार इस मनोनयन में भाजपा को भी बड़ा हिस्सा मिलेगा। पिछली बार 2014 में जब मनोनयन हुआ था, तब सभी 12 सीटों पर जदयू के सदस्य ही मनोनीत हुए थे। इनमें से सभी सदस्य टर्म पूरा होने के कारण कल शनिवार को रिटायर हो गए। इससे 75 सदस्यीय बिहार विधान परिषद में अब केवल 46 सदस्य ही रह गए हैं।

लॉकडाउन ने रोका चुनाव, राज्यपाल कोटे से मनोनयन संभव

कोरोना लॉकडाउन के चलते विधान परिषद का चुनाव नियत समय पर नहीं हो पाया। सदस्य तय वक्त पर रिटायर तो होते गए, पर रिक्त हुई सीटें नहीं भरी। नतीजा अब तक कुल 29 सदस्यों की सीटें परिषद में खाली हो गईं हैं। इसमें सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सबसे पहले राज्यपाल द्वारा मनोनीत होने वाली 12 सीटें भरी जायेंगी। यह भी जानकारी मिली है कि इस बार मनोनीत होने वाली सीटों में भाजपा को भी बड़ा हिस्सा मिलेगा। हालांकि संख्या तय नहीं है।

एनडीए—1 सरकार के फार्मूले पर भाजपा को मिलेगा हिस्सा

जानकारी के अनुसार नए मनोनयन में भाजपा की हिस्सेदारी गठबंधन धर्म के तहत बिहार में एनडीए सरकार के पहले मनोनयन के आधार पर की जाएगी। तब इस फार्मूले में भाजपा को 12 में से 7 सीटें मिली थीं। इस आधार पर लोजपा भी कम से कम एक सीट मांग सकती है। फिलहाल क्या फार्मूला अपनाया जाता है, इसे लेकर एनडीए के विभिन्न घटकों में बैठकों का दौर शुरू हो गया है।

2014 में जदयू से ही मनोनीत किये गए थे सभी 12 सदस्य

गौरतलब है कि राज्य कैबिनेट की सिफारिश पर परिषद के 12 सदस्यों का मनोनयन राज्यपाल करते हैं। 2014 में मनोनीत सभी सदस्य जनता दल यूनाइटेड से ही थे। इनमें से दो राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह और पशुपति कुमार पारस लोकसभा में चले गए। पारस 2018 में मनोनीत हुए थे क्योंकि 2014 में मनोनित जदयू के नरेंद्र सिंह की सदस्यता बीच में ही रद्द हो गई थी।