प्रवासियों से बिहार में कम्यूनिटी स्प्रेड का खतरा, 707 मरीजों में 179 ट्रेन से आये
पटना : प्रवासी मजदूरों के कारण बिहार कोरोना के सबसे भयंकर अटैक की जद में आ गया है। यहां इसने खतरनाक रूप अख्तियार करना शुरू भी कर दिया है। कारण कि जो प्रवासी मजदूर बिहार आ रहे हैं, उनमें से अधिकत अपने साथ कोरोना भी ला रहे हैं। बिहार में ताजा अपडेट के अनुसार कुल 707 कोरोना के मरीज हैं जिनमें 179 ऐसे हैं जो लॉकडाउन फेज—3 में लौटे प्रवासी मजदूर हैं। ये तो मात्र झलकी है जो केवल सवा लाख बिहारियों के राज्य में वापस आने पर दिखी है। अभी तो लगभग 16 लाख प्रवासी अगले कुछ सप्ताहों में बिहार आने बाकी हैं।
कुल 17 लाख प्रवासियों को लाना बड़ी चुनौती
बिहार सरकार के आंकड़ों के मुताबिक़ क़रीब 17 लाख प्रवासी बिहारी मज़दूर राज्य में वापस आयेंगे। इनमें अब तक 83 ट्रेनों से करीब 102196 प्रवासी बिहार आ चुके हैं। लेकिन अभी भी लगभग पौने 16 लाख को वापस लाना बाकी है और जिसकी प्रक्रिया जारी है। ऐसे में हम सचेत नहीं हुए तो यह सहज समझा जा सकता है कि थोड़ी भी लापरवाही बिहार पर प्रवासी मजदूरों के रूप में कितनी बड़ी आफत बन सकती है।
संक्रमण बढ़ने का बडा खतरा, दिखने लगा ट्रेंड
प्रवासी मजदूरों से संक्रमण के खतरे का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पिछले 24 घंटों में बिहार में मिले कोरोना के 100 मरीजों में अकेले 86 ऐसे हैं जो ट्रेन से आए थे। ये सभी प्रवासी मजदूर हैं। यह भी उल्लेखनीय है कि प्रवासी मजदूरों के आने का सिलसिला अभी जारी है और यह अगले कई दिनों तक कई फेजों में जारी रहेगा। इसका मतलब है कि बिहार पर कोरोना का दबाव लगातार बढ़ता जाएगा।
86 ट्रेनों में जल्द बिहार आएंगे सवा लाख लोग
जानकारी के अनुसार अगले कुछ दिनों में 86 ट्रेनों से 120402 लोग वापस लाए जाएंगे। आज सोमवार को भी 20 ट्रेनों में 11 राज्यों से 23840 प्रवासी बिहार आ रहे हैं। मुंबई से अगले कुछ दिनों तक रोजाना 3 ट्रेन प्रवासियों को लेकर आएगी। अब तक 83 ट्रेनों से 102196 प्रवासी लौटे हैं। इसके अलावा कोटा में बचे हुए छात्रों को बिहार वापस लाया जाएगा। कुल मिलाकर देखा जाए तो हालात काफी विस्फोटक और चुनौतीपूर्ण होने वाले हैं।
ऐसे में बड़ी जिम्मेदारी राज्य सरकार के अफसरों और तंत्र की है। प्रवासियों की सही स्क्रीनिंग, उनकी निगरानी और क्वारंटाइन को बार—बार मॉनिटर करने की जरूरत है। जो भी बाहर से आये हैं, चाहे उनमें लक्षण हो या नहीं, उनकी रेलवे स्टेशन से लेकर गांव—पंचायत स्तर तक बार—बार खोज खबर लेनी आवश्यक है।