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बीडी सावरकर को क्यों दी गई ‘वीर’ की उपाधि? जानें PM पीएम मोदी ने क्या कहा?

नयी दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज गुरुवार को विनायक दामोदर सावरकर की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि दी। पीएम ने उन्हें याद करते हुए कहा कि वीर सावरकर एक सच्चे देशभक्त थे जो मातृ भूमि के लिए सब कुछ बलिदान करने के लिए तैयार थे। पीएम मोदी ने ट्विटर पर एक वीडियो पोस्ट कर कहा कि 1857 में ये मई का ही महीना था जब भारतवासियों ने अंग्रेजों को अपनी ताकत दिखाई। प्रधानमंत्री ने लिखा, ‘मैं साहसी वीर सावरकर को नमन करता हूं, हम उन्हें उनकी बहादुरी, स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान और हजारों लोगों को प्रोत्साहित करने के लिए नमन करते हैं।’ आइए हम भी जानें कि आखिर क्यों सावरकर को ‘वीर’ की उपाधि दी गई थी?

बीडी सावरकर ऐसे बने भारत के सपूत ‘वीर सावरकर’

दरअसल, साल 1936 में कांग्रेस के साथ मतभेद की वजह से सावरकर का पार्टी के भीतर विरोध होने लगा था। पूरी पार्टी और कार्यकर्ता सावरकर के विरोध में आ गए थे। लेकिन कांग्रेस में ही एक ऐसे व्यक्ति भी थे जो सावरकर के साथ खड़े हुए थे। इस व्यक्ति का नाम पीके अत्रे था जो कि मशहूर पत्रकार, शिक्षाविद, कवि और नाटककार थे और वीर सावरकर से बेहद प्रभावित थे।

कांग्रेस का ढोंग एक कांग्रेसी अत्रे ने ही किया उजागर

पीके अत्रे ने पुणे में अपने बालमोहन थिएटर के कार्यक्रम में सावरकर स्वागत कार्यक्रम आयोजित किया था। इसके विरोध में कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने सावरकर को काले झंडे दिखाने की धमकी भी दी थी। इस विरोध के बावजूद हजारों की संख्या में लोग इस कार्यक्रम में आए और सावरकर का स्वागत कार्यक्रम संपन्न हुआ। इसी दौरान, अत्रे ने सावरकर को वीर की उपाधि से संबोधित करते हुए कहा-‘जो काला पानी से नहीं डरा, काले झंडों से क्या डरेगा?’

स्वात़ंत्र्यवीर उपाधि से किया सावरकर का अभिनंदन

पीके अत्रे के संबोधन के बाद पुणे का सभागार तालियों से गूंज उठा। उसके बाद सावरकर ने भी एक प्रभावशाली भाषण दिया। सावरकर के भाषण के बारे में अत्रे ने लिखा कि उनका संबोधन इतना प्रभावशाली था कि सावरकर ने पुणे की जनता का दिल जीत लिया था। इसमें उन्होंने कांग्रेस की कड़ी आलोचना की थी। जब सावरकर जेल में बंद थे तब उन्होंने 1857 की क्रांति पर आधारित विस्तृत मराठी ग्रंथ ‘1857 चे स्वातंत्र्य समर’ लिखा था। यह ग्रंथ बेहद चर्चित हुआ था और इसी के नाम से अत्रे ने सावरकर को ‘स्वातंत्र्यवीर’ नाम दिया था।