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04 अक्टूबर : नवादा की मुख्य खबरें

वारिसलीगंज में 17 लाख तीन हजार कैश बरामद, महिला समेत दो गिरफ्तार

नवादा : जिले में पुलिस ने गुप्त सूचना पर वारिसलीगंज में साइबर अपराधी के घर पर छापेमारी कर 17 लाख 03 हजार रुपये कैश बरामद किया। मामला वारिसलीगंज थाना क्षेत्र के सोंढ़ीपुर गांव का बताया जाता है। मौके से एक महिला समेत दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि मुख्य अपराधी चंदन मिस्त्री समेत अन्य पुलिस के पहुंचने से पहले भाग निकले। पुलिस ने घर की तलाशी के दौरान तीन मोबाइल व साइबर अपराध से जुड़े कई दस्तावेज बरामद किये हैं।

बताया जाता है कि पुलिस को सोंढ़ीपुर गांव में साइबर अपराधी चंदन मिस्त्री के घर पर साइबर अपराध के माध्यम से जुटाये गये रुपयों के आपस में बंटवारा किये जाने की सूचना मिली थी। सूचना पर पकरीबरावां एसडीपीओ महेश चौधरी के नेतृत्व में छापेमारी की गयी। छापेमारी के क्रम में चंदन मिस्त्री की पत्नी और उसके साला को गिरफ्तार कर लिया गया।

पीतल के गगरा से किया गया बरामद

सूचना पर पहुंची पुलिस ने घर चंदन मिस्त्री के घर को चारों ओर से घेर लिया। घर की तलाशी ली गयी। तलाशी के दौरान चंदन की पत्नी की निशानदेही पर घर के कमरे में पीतल के गगरा में रखे गये 10 लाख रुपये बरामद किये गये। जबकि 07 लाख 03 हजार रुपये एक बैग से बरामद किये गये। घर से तीन मोबाइल व कई दस्तावेज बरामद किये गये।

पुलिस के मुताबिक इन दस्तावेजों के माध्यम से अपराधियों के अपराध का ब्योरा जुटाया जा रहा है। वारिसलीगंज एसएचओ आशीष कुमार मिश्रा के मुताबिक मामले में प्राथमिकी दर्ज की जा रही है। इनमें कई अपराधियों को नामजद किया जा रहा है। वहीं अन्य अपराधियों की तलाश में पुलिस द्वारा छापेमारी की जा रही है।

कहते हैं अधिकारी

वारिसलीगंज के सोंढ़ीपुर गांव में साइबर अपराधी चंदन मिस्त्री के घर पर साइबर अपराध से जुटाये गये रुपयों के अपराधियों द्वारा आपस में बंटवारा किये जाने की सूचना मिली थी। सूचना पर छापेमारी की गयी। परंतु चंदन भाग निकला। उसकी पत्नी व साला को गिरफ्तार किया गया है। पत्नी की निशानदेही पर घर से 17 लाख 03 हजार रुपये व मोबाइल समेत कई दस्तावेज बरामद किये गये हैं।

बालू खनन को ले अब भी जिले में संशय बरकरार

नवादा : बालू खनन को लेकर जिले में संशय की स्थिति बरकरार है। सरकार के आदेश के तीसरे दिन भी जिले में नदियों से बालू खनन शुरू नहीं किया जा सका है।

सुप्रीम कोर्ट से ग्रीन सिग्नल मिलने के बाद बिहार स्टेट माइनिंग कॉरपोरेशन ने जिले के डीएम व खनिज विकास पदाधिकारी को पत्र भेजकर पुराने बंदोबस्तधारी को 01 अक्टूबर से तीन माह का अवधि विस्तार देकर खनन शुरू कराने का आदेश निर्गत किया था। इसके लिए विभागीय स्तर पर पुराने बंदोबस्तधारी को सूचित करने व निर्धारित गाइडलाइन के तहत बालू खनन शुरू करने का आदेश है। खनन से पूर्व बंदोबस्तधारी के साथ तीन माह का एकरारनामा करने व सुरक्षित जमा राशि जमा कराने का निर्देश दिया गया है।

बता दें कि 01 अक्टूबर से जिले में पांच वर्षों के लिए बालू घाटों की बंदोबस्ती करायी जानी थी। परंतु तकनीकी पेंच के कारण बंदोबस्ती तत्काल संभव नहीं हो सका। इसके लिए सरकार सुप्रीम कोर्ट गयी और कोर्ट ने 26 सितम्बर को सरकार को तीन माह यानि 25 दिसम्बर 2022 तक के लिए अवधि विस्तार की अनुमति दे दी। इस बीच कोर्ट ने सरकार को 25 दिसम्बर से पूर्व पांच वर्षों के लिए बंदोबस्ती की प्रक्रिया पूरा कर लेने का निर्देश दिया।

किसे मिलेगा अवधि विस्तार

कॉरपोरेशन द्वारा जारी पत्र में पुराने बंदोबस्तधारी को अवधि विस्तार देकर खनन शुरू कराने का निर्देश है। पुराने बंदोबस्तधारी को लेकर भी संशय बना है।

जिले में 31 दिसम्बर 2021 तक जय माता दी इंटरप्राइजेज को खनन की अनुमति (अवधि विस्तार) प्राप्त थी। वहीं 01 जनवरी से 31 मार्च 2022 तक की अवधि के लिए एकलव्य स्टोन एंड माइन्स के नाम बंदोबस्ती की गयी थी। हालांकि पर्यावरणीय प्रमाणपत्र उपलब्ध न हो पाने के कारण एकलव्य द्वारा जिले में खनन शुरू नहीं किया जा सका। अब इसे लेकर जिले में अनिश्चितता की स्थिति बनी है कि किस बंदोबस्तधारी को खनन के लिए अवधि विस्तार मिलेगा।

खनन कार्यालय द्वारा इस बारे में अब तक कोई अपडेट जारी नहीं किया गया है। वहीं बालू का खनन शुरू नहीं होने से लोगों की फजीहत बढ़ी हुई है। चोरी छुपे ऊंची कीमतों पर लोग बालू खरीदने पर विवश हैं।

33 बालू घाटों पर होना है खनन

जिला सर्वेक्षण रिपोर्ट (डीएसआर) के मुताबिक जिले में 33 बालू घाट बनाये गये हैं। इन्हीं घाटों में बालू खनन की अनुमति होगी। इससे पूर्व जिले में 59 बालू घाट थे। नये डीएसआर में वन एवं पर्यावरण नियमों के तहत 26 बालू घाटों को समाप्त कर दिया गया।

वर्तमान डीएसआर में वन्य प्राणी आश्रयणी क्षेत्र (वाइल्ड लाइफ सैंक्चुरी) व पर्यावरण संवेदनशील (ईको सेंसेटिव) इलाकों के 10 किलोमीटर के दायरे में आने वाली नदियों में बालू घाटों की स्वीकृति नहीं दी गयी। साथ ही वन विभाग के 01 किलोमीटर, पुल-पुलिया से 200 मीटर के दायरे में व अधिक जनसंख्या वाले इलाकों तथा नदियों में अधिक पानी वाली जगहों पर भी बालू घाटों की अनुमति नहीं दी गयी।

बंदोबस्ती में ऐसे फंस गया पेंच

सरकारी निर्देशों के आलोक में नयी खनन नीति के अनुसार 01 अक्टूबर से जिला सर्वेक्षण रिपोर्ट (डीएसआर) के आधार पर नए बालू घाटों की अगले 5 वर्षों के लिए ई-नीलामी से बंदोबस्ती की प्रक्रिया शुरू की गयी। इसके लिए डीएसआर में खनन योग्य बालू की मात्रा और स्वामित्व दर को आधार बनाया गया। डीएसआर में 80 फीसदी खनन योग्य बालू की मात्रा निर्धारित कर 75 फीसदी स्वामित्व दर के आधार पर सुरक्षित जमा राशि तय की गयी। परंतु 60 फीसदी खनन योग्य बालू की मात्रा से अधिक का निर्धारण नहीं किये जाने के प्रावधान के कारण बंदोबस्ती में पेंच फंस गया।

इस बीच सरकार ने जिले को दोबारा नयी दर निर्धारित कर बंदोबस्ती की प्रक्रिया शुरू करने का आदेश दिया। परंतु इसमें विलंब के कारण सरकार को अवधि विस्तार का सहारा लेना पड़ा।

नौ माह से मची है जिले में बालू की लूट

नवादा : 01 जनवरी 2022 से बंदोबस्ती नहीं होने के कारण जिले में बालू का खनन ठप पड़ा है। 31 दिसम्बर तक जय माता दी इंटरप्राइजेज के नाम बालू खनन की बंदोबस्ती थी। 01 जनवरी से तीन माह के लिए एकलव्य स्टोन एंड माइन्स को बंदोबस्ती मिली, पर ईसी नहीं मिल पाने के कारण खनन शुरू नहीं हो सका।

जून में कोर्ट के आदेश पर अवधि विस्तार पर रोक व 01 जुलाई से 30 सितम्बर तक की तीन माह की अवधि में एनजीटी के आदेश पर नदियों से बालू के खनन पर रोक लगी रही। इस दौरान जिले में बालू की लूट मची है।

वारिसलीगंज, कादिरगंज, कौआकोल, हिसुआ, नारदीगंज आदि जगहों पर बालू माफियाओं का दबदबा बना है। वारिसलीगंज का इलाका तो रेड कोरिडोर बना है। इस इलाके से हर रोज अपसढ़ होते हुए शाहपुर मोड़ से बरबीघा के रास्ते सैंकड़ों ट्रक बालू दूसरे जिलों में खुलेआम भेजा जा रहा है। आरोप है कि अधिकारियों की मिलीभगत से हर दिन लाखों के राजस्व का नुकसान हो रहा है।

पूजा करने के दौरान महिला के गले से काटा सोने की चेन

नवादा : नगर के प्रसाद बीघा स्थित दुर्गा मंदिर में पूजा के दौरान एक महिला के गले से सोने की चैन काटकर चोर फरार हो गया। जिसके बाद पीड़ित महिला ने नगर थाने में आवेदन देकर न्याय की गुहार लगाई। बताया जा रहा है कि पोस्टमार्टम रोड निवासी राजेंद्र प्रसाद की पत्नी सरोज देवी प्रसाद बीघा दुर्गा मंदिर में सोमवार की सुबह पूजा करने गई थी, तभी अज्ञात चोर ने महिला के गले से सोने की चैन काट लिया।

जब तक महिला हल्ला मचाती, तब तक चोर वहां से भाग निकला था। चैन का वजन 36 ग्राम था, जिसकी लागत एक 1 लाख 30 हजार रुपये बताया जा रहा है। जब मंदिर में चैन चोरी का हल्ला हुआ तो पूजा करने आई अन्य महिलाएं सतर्क हो गई और अपने गहने को खोल कर रख लिया।

भीड़ का फायदा उठा रहे हैं चोर

पीड़ित महिला ने बताया कि मंदिर में काफी भीड़ थी। पूजा करने के दौरान एक महिला मेरे पीछे काफी देर से मंड़रा रही थी। आशंका है कि उसी महिला ने मेरे गले से सोने का चैन काट कर भागी है।

बता दें कि मां दुर्गा का पट खुलते ही सभी मंदिरों एवं पूजा पंडालों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। इसी भीड़ का फायदा चोर उठा रहे हैं। हालांकि जिला प्रशासन द्वारा जिले के 335 स्थानों पर दंडाधिकारी और पुलिस पदाधिकारी के साथ सशस्त्र बलों की तैनाती भी की गई है।

शकील अख़्तर को कन्वेनर व एकरामुद्दीन को उप कन्वेनर की जिम्मेदारी

नवादा : नगर के पार नवादा मोमिन उच्च विद्यालय अंसारनगर में मजलिस उल उलेमा वल उममह के जिला अध्यक्ष मौलाना मो० जहांगीर आलम महजूरुल क़ादरी की अध्यक्षता में उर्दू भाषी शिक्षकों की बैठक हुई जिसमें समाज और शिक्षा से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की गई और शिक्षकों के सामने जो समस्याएं उत्पन्न होती रहती हैं उस पर गहन विचार विमर्श किया गया।

बैठक में सर्वसम्मति से मास्टर शकील अख़्तर को कन्वीनर और मास्टर एकराम उद्दीन को उप कन्वीनर बनाया गया। इस अवसर पर मौलाना मो० जहांगीर आलम महजूरुल क़ादरी जिला अध्यक्ष बसुटा, मास्टर अली इमाम जिला सचिव बसुटा, मौलाना नौशाद ज़ुबैर मलिक जिला सचिव मजलिस उल उलेमा, मुफ्ती इनायतुल्लाह क़ासमी कार्यालय सचिव मजलिस उल उलेमा नवादा, मास्टर एकराम उद्दीन, मास्टर शकील अख़्तर, मास्टर मुज़फ्फर, मास्टर जावेद इकबाल, मास्टर आसिफ, क़ारी मेराजुद्दीन, मास्टर ग़ुलाम हसनैन, मास्टर ज़हीर अनवर, मास्टर फारूक आज़म,मास्टर इस्लाम उद्दीन आदि उपस्थित हुए। अंत में अध्यक्ष के धन्यवाद प्रस्ताव से बैठक संपन्न हुई।

सनकी दामाद ने सास व पत्नी की पत्थर से कूच कर की हत्या

नवादा : जिले के हिसुआ नगर से एक बड़ी खबर आ रही है जहां नशे में धूत्त दामाद ने सास व पत्नी की पत्थर से कूच कर हत्या कर दी। घटना हिसुआ थाना क्षेत्र के प्रोफेसर कालोनी की है। सूचना के आलोक में पहुंची पुलिस ने मामले की तहकिकात आरंभ कर दी है।

बताया जाता है कि अकबरपुर थाना क्षेत्र के पहाड़पुर गांव के शुभम कुमार के श्वसुर गया जिले के अतरी के रहने वाले हैं. वर्ष 92 से हिसुआ प्रोफेसर कालनी में भाड़े के मकान में रहकर खटाल चलाते हैं। उन्होंने अपनी पुत्री की शादी पहाड़पुर के शुभम कुमार के साथ की थी. शुभम कामचोर था फलतः पति-पत्नी के साथ अक्सर विवाद होता रहता था।

देर शाम पति-पत्नी का विवाद उग्र रुप धारण कर लिया. बीच बचाव करने आयी सास को देख आग बबूला हो उठा तथा सर पत्थर से प्रहार कर दोनों को मौत की निंद सुला फरार हो गया। सूचना के आलोक में पहुंचे थानाध्यक्ष मोहन कुमार ने शव को पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेजा है। हत्या के कारणों का पता नहीं चल सका है। उन्होंने बताया कि अभी कोई आवेदन प्राप्त नहीं हुआ है। आवेदन के आलोक में अग्रेतर कार्रवाई की जायेगी।

दामाद ने सास और पत्नी को ईंट से कूच कर मार डाला, घटना को अंजाम देकर आरोपित हुआ फरार

नवादा : दामाद ने अपनी ही सास और पत्नी की निर्मम हत्या कर दिया। घटना सोमवार 3 अक्टूबर की रात हिसुआ नगर परिषद क्षेत्र के प्रोफेसर कॉलोनी की है। मृतकों की पहचान गया जिले के अतरी थाना क्षेत्र के सुधीर सिंह की पत्नी संगीता देवी व पुत्री मौसम कुमारी के रुप में हुई है।

पुलिस ने सूचना पर घटनास्थल पहुंच शव को अपने कब्जे में ले लिया है। आरोपित दामाद जिले के अकबरपुर थाना क्षेत्र के पहाड़पुर निवासी विनोद सिंह का पुत्र शुभम कुमार बताया गया है। स्थानीय लोगों के अनुसार दामाद ने घटना को अंजाम तब दिया जब मुहल्ले के लोग देवी मंदिर में चल रहे प्रवचन को सुन रहे थे। लोगों के अनुसार पति पत्नी के बीच हमेशा झड़प होती रहती थी।

सोमवार कि शाम भी पति पत्नी में नोंकझोंक हुई थी जिस पर पति शुभम अपनी पत्नी को बेरहमी से मारपीट करने लगा। इस दौरान शुभम ईंट से पत्नी पर बार कर दिया। बेटी कि पिटाई होता देख मां बीच बचाव करने पहुंची जिसपर सास को भी शुभम ने उसी ईंट से सर पर बेरहमी से बार कर दिया। घटना में दोनों मां बेटी ने मौके पर दम तोड़ दिया।

जिले में ढाई लाख पंजीकृत किसानों में से, अबतक सिर्फ 16 को ही मिल सका डीजल अनुदान

नवादा : करीब 22 सौ आवेदन में अधिकतर आवेदन प्राथमिक जांच में ही रिजेक्ट किए गए। जून जुलाई और अगस्त माह में कम बारिश के कारण जिले में धान रोपनी की कम हुई और सुखाड़ जैसे हालात हैं। इससे राहत के लिए सरकार ने “डीजल अनुदान” की घोषणा की थी लेकिन जिले में यह योजना मजाक बन गई।

जिले में लगभग ढाई लाख किसान सरकार के पोर्टल से पंजीकृत है और करीब 2 लाख से अधिक किसान नियमित तौर पर खेती कर रहे हैं लेकिन इनमें से सिर्फ 16 किसानों को डीजल अनुदान की राशि मिली है। वह भी नाममात्र की। ऐसे में जिले में इस योजना की प्रासंगिकता पर सवाल खड़े हो गए हैं।

जिले में इस योजना की विफलता के लिए बिजली से पटवन को कारण बताया जा रहा है। बताया जा रहा है कि शत प्रतिशत किसान बिजली चालित समरसेबल और पंपसेट से पटवन कर रहे हैं । तो ऐसे में सवाल उठता है कि जब पटवन बिजली से हो रही है तो अनुदान बिजली के लिए मिलना चाहिए। जिले में ऐसी योजना का क्या लाभ है।

कृषि कार्यालय सूत्रों के अनुसार अब तक डीजल अनुदान के लिए करीब 22 सौ आवेदन आए हैं लेकिन अधिकतर आवेदन प्राथमिक जांच में ही रिजेक्ट हो गए और सिर्फ 16 लोगों को अनुदान राशि मिली है। डेढ़ लाख से अधिक जरूरतमंद किसानों को अनुदानित बीज नहीं मिल पाया। इस साल जिले में आधी रोपनी भी नहीं हुई है और 50 हजार हेक्टेयर से अधिक भूमि परती है।

खरीफ फसल की नुकसान को कम करने के लिए रबी फसल ( मक्का, दलहन, तिलहन) को अग़ात लगाए जाने की योजना है। इसके लिए जिले के किसानों के बीच आकस्मिक फसल के लिए फ्री में बीज वितरण किया गया है। लेकिन यह बीज जिले के किसानों की संख्या को देखते हुए ऊंट के मुंह में जीरा साबित होगा।

जिले के 40000 किसानों के बीच 2520 क्विंटल बीज वितरण हुआ है जबकि जिले में करीब ढाई लाख से अधिक निबंधित किसान हैं और इनमें से करीब दो लाख किसान ऐसे हैं जो खेती कर रहे हैं। हर साल जिले के 2 लाख से अधिक किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की राशि भेजी जाती है। ऐसे में लगभग डेढ़ लाख से अधिक जरूरतमंद किसानों को अनुदानित बीज नहीं मिल पाया है।

चुकी बीज का वितरण पहले आओ पहले पाओ की तर्ज पर हुआ है। जो किसान जागरूक थे या कृषि कर्मियों के संपर्क में थे उन्हें बीज मिल गया जबकि जो किसान शहर बाजार कम आते थे उन्हें बीज नहीं मिली है जबकि बीज की सबसे ज्यादा जरूरत उन्हीं को थी। बता दें कि इस साल के मानसून सीजन में बेहद कम बारिश के चलते धान की खेती आधी भी नहीं हो पाई है ऐसे में लगभग 50 हजार हेक्टेयर से अधिक जमीन परती है।

इतनी मात्रा में लगेगी फसलें

फिलहाल 53,994 हेक्टेयर में मक्का अरहर उड़द तोड़िया सरसों मटर भिंडी मूली और पालक के उत्पादन के लिए बीज की डिमांड भेज दी गई है। 53,994 हेक्टेयर में से अरहर 1546 हेक्टेयर में, मक्का 12413 हेक्टेयर, उड़द 2468 हेक्टेयर 493 तोड़िया 11050 हेक्टेयर, अगात सरसों , हेक्टेयर 290 आगत मटर 335 हेक्टेयर, भिंडी 144 हेक्टेयर, मूली 138 हेक्टेयर और पालक 87 हेक्टयर में उपजाने का लक्ष्य रखा गया है। जिले के सुखाड़ पीड़ित किसान मदद के लिए सरकार की ओर देख रहे हैं।

किसान बताते हैं कि बीज और डीजल अनुदान योजना से कोई विशेष मदद नहीं मिलेगी। सरकार बिजली बिल माफ करें और रवि फसल की तैयारी के लिए सुखाड़ इनपुट अनुदान वितरित करें तो थोड़ी बहुत राहत मिलेगी। साल 2019 में सुखाड़ के बाद हम लोगों को 5 से 10000 तक का अनुदान मिला था उससे रबी फसल लगाने की पूंजी बनी थी। इस बार भी कुछ ऐसा हो । नहीं तो बाकी सब योजनाएं दिखावटी है।

40 हजार किसानों को मिला बीज, अच्छादन की होगी समीक्षा

डीजल अनुदान के लिए करीब 2200 आवेदन आए हैं। इनमें से 16 किसानों को डीजल अनुदान की राशि भेजी गई है। चुकी जिले में अधिकतर जगह बिजली के उपकरण से पटवन हो रहा है इसलिए जांच डीजल अनुदान के दावे गलत हो रहे है।

किसान स्वयं आवेदन नहीं कर रहे। 40000 किसानों के बीच 2500 क्विंटल बीज वितरित कर दिया गया है। इसके अच्छादन की समीक्षा की जा रही है। जहां तक सुखाड़ इनपुट राशि की बात है तो इसकी चर्चा चल रही है। मुख्यालय के निर्देश का इंतजार किया जा रहा है।

पटना उच्च न्यायालय के फैसले के बाद मान लीजिए टल ही जाएगा शहरी निकाय चुनाव

नवादा : नगर निकाय चुनाव के विभिन्न पदों के उम्मीदवारों के लिए कतई यह अच्छी खबर नहीं है कि चुनावी प्रक्रिया अगले आदेश तक के लिए स्थगित हो सकती है। नगर निकाय चुनाव में पिछड़ा वर्ग को आरक्षण सुप्रीम कोर्ट के आदेश के विपरीत बिहार में दिया गया है, ऐसा पटना हाई कोर्ट ने माना है। हाई कोर्ट का जो फैसला आया है, सभी पक्षों की परेशानी बढ़ाने वाला है।

मतदान के महज एक सात दिन पहले आए इस फैसले ने उम्मीदवारों को कहीं का नहीं छोड़ा है। उम्मीदवार अपना सबकुछ झोंक चुके थे। प्रशासनिक स्तर पर भी तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा चुका था। अब हाई कोर्ट का फैसला उम्मीदवारों ही नहीं प्रशासन से लेकर राज्य निर्वाचन आयोग की मुश्किलें बढ़ा दिया है। पिछड़ा वर्ग को दिया गया आरक्षण सुप्रीम कोर्ट के 2010 में दिए गए आदेश के विपरीत माना गया है।

हाई कोर्ट का फैसला आने के बाद आगे क्या होगा इसपर कयासों का दौर जारी है। अपने अपने स्तर से आकलन हो रहा है। कुछ का मानना है की पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित सीट को छोड़कर अन्य सीटों पर चुनाव करा लिया जाएगा। हाई कोर्ट का फैसला है कि पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित सीट को सामान्य घोषित कर चुनाव कराया जा सकता है। लेकिन, बड़ा सवाल है कि क्या राज्य निर्वाचन आयोग अपने स्तर से ऐसा निर्णय ले सकती है? राज्य सरकार की चाहत को नजर अंदाज किया जा सकता है? सरकार पिछड़ा वर्ग को यूं ही मंझधर में छोड़कर चुनाव कराने की मंशा रखती है? यह सब साफ होना अभी बाकी है।

सवाल यह भी है कि क्या राज्य निर्वाचन आयोग फिर से हाई कोर्ट या आगे सुप्रीम कोर्ट नहीं जाएगी? एक्सपर्ट का मानना है कि राज्य निर्वाचन आयोग पुनर्विचार याचिका दाखिल कर सकती है। जरूरत पड़ने पर सुप्रीम कोर्ट का भी रुख कर सकती है। ये कुछ ऐसे बुनियादी सवाल हैं जो चुनाव के रास्ते में बाधक है।

इधर, पूरे मामले पर निर्वाचन से जुड़े एक अधिकारी से बात की गई तो उनका कहना था कि आज शाम तक स्थिति साफ हो जाएगी की 10 अक्टूबर का चुनाव होगा या नहीं। चुनाव होगा तो किस स्वरूप में होगा। हाई कोर्ट के फैसले का अध्ययन राज्य निर्वाचन आयोग के विधि विशेषज्ञों द्वारा किया जा रहा है। आज शाम तक राज्य निर्वाचन आयोग का आदेश निर्देश जिला प्राप्त हो जायेगा। वैसे इस बात की संभावना ज्यादा है कि चुनाव को अगले आदेश तक के लिए स्थगित कर दिया जाए। राज्य निर्वाचन आयोग आधा अधूरा चुनाव नहीं कराना चाहेगी।

दरअसल, जिस नगर निकाय में अध्यक्ष-का पद पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित किया गया है, वहां सिर्फ वार्ड का चुनाव कराने से कोई फायदा होने वाला नहीं है। हाई कोर्ट के फैसले का असर देखिए, नवादा नगर परिषद के मुख्य और उप मुख्य पार्षद का पद पिछड़ा महिला के लिए आरक्षित था। 10 अक्टूबर को पहले फेज में मतदान होना था। हाईकोर्ट का आदेश आने के बाद सभी उम्मीदवारों के चुनावी दफ्तर में ताला लटक गया है। प्रचार प्रसार बंद कर प्रत्याशी बुझे मन से घर को लौट गए हैं। अन्य पदों के उम्मीदवारों के स्पीड पर ब्रेक लग गया है। कुल मिलाकर यही कहा जा सकता है कि चुनाव टलना फिलहाल तय दिखता है। ऐसे में उम्मीदवार दिल थामकर बैठें, शाम तक का इंतजार करें। सबकुछ साफ हो जाएगा।