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जीवित्पुत्रिका व्रत : जानिए इस पर्व का शुभ मुहूर्त और विशेष महत्व

पटना : अश्विन मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि के दिन जीवित्पुत्रिका का व्रत किया जाता है। 2020 में यह व्रत 10 सितंबर गुरुवार को रखा जाएगा।यह व्रत संतान के हित की कामना से किया जाता है। मान्यता है कि जितिया व्रत करने से संतान की लंबी उम्र होती है। यह व्रत उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार और झारखंड में बहुत प्रसिद्ध है। इस व्रत को जिउतिया व्रत और जीवित्पुत्रिका व्रत भी कहा जाता है।

जितिया व्रत का शुभ मुहूर्त

10 सितंबर- दोपहर 2 बजकर 5 मिनट से अगले दिन 11 सितंबर को 4 बजकर 34 मिनट तक रहेगा।
पारण का शुभ मुहूर्त- 11 सितंबर को दोपहर 12 बजे तक पारण किया जाएगा।

जितिया व्रत का महत्व

जीवित्पुत्रिका व्रत की कथा महाभारत से जुड़ी है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, अश्वत्थामा ने बदला लेने के लिए उत्तरा की गर्भ में पल रही संतान को मारने के लिए ब्रह्नास्त्र का इस्तेमाल किया। उत्तरा के पुत्र का जन्म लेना जरूरी था। फिर भगवान श्रीकृष्ण ने उस बच्चे को गर्भ में ही दोबारा जीवन दिया। गर्भ में मृत्यु को प्राप्त कर फिर से जीवन मिलने के कारण उसका नाम जीवित पुत्रिका रखा गया। बाद में यह राजा परीक्षित के नाम से जाना गया।

Jivitputrika Vrat 2020 Date shubh muhurat puja vidhi jitiya vrat katha  significance paran time nahay khay : Jivitputrika Vrat 2020: कब है जितिया  व्रत, जानिए शुभ मुहूर्त, पूजन विधि और व्रत कथाएं -

सब्जियों का विशेष महत्व

इस व्रत में सतपुतिया की सब्जी का विशेष महत्व है। रात को बने अच्छे पकवान में से पितरों, चील, सियार, गाय और कुत्ता का अंश निकाला जाता है। सरगी में मिष्ठान आदि भी होता है। मिथिला में मड़ुआ रोटी और मछली खाने की परंपरा जिउतिया व्रत से एक दिन पहले सप्तमी को मिथिलांचलवासियों में भोजन में मड़ुआ रोटी के साथ मछली भी खाने की परंपरा है। जिनके घर यह व्रत नहीं भी होता है उनके यहां भी मड़ुआ रोटी व मछली खाई जाती है। व्रत से एक दिन पहले आश्विन कृष्ण सप्तमी को व्रती महिलाएं भोजन में मड़ुआ की रोटी व नोनी की साग बनाकर खाएंगी।

सियारिन व चूल्होरिन की प्रतिमा बनाकर व्रती महिलाएं करेंगी जिउतिया पूजा

इस व्रत को जितिया या जीउतिया या जीवित्पुत्रिका व्रत के नाम से भी जानते हैं। अश्विन कृष्ण अष्टमी तिथि को जीवित्पुत्रिका व्रत का बड़ा महात्म्य है। गोबर-मिट्टी की प्रतिमा बनाकर पूजा कुश के जीमूतवाहन व मिट्टी-गोबर से सियारिन व चूल्होरिन की प्रतिमा बनाकर व्रती महिलाएं जिउतिया पूजा करेंगी। फल-फूल, नैवेद्य चढ़ाए जाएंगे। जिउतिया व्रत में सरगही या ओठगन की परंपरा भी है। गंगा सहित अन्य पवित्र नदियों में स्नान करने के बाद मड़ुआ रोटी, नोनी का साग, कंदा, झिमनी आदि का सेवन करेंगी।