बिहार में उच्च शिक्षण संस्थानों में सेमिनार-सिम्पोजियम की परंपरा रुकती दिख रही है। विविध कारणों से कालेज विरान होने लगे हैं। छात्र-छात्राओं व शिक्षकों की उपस्थिति अत्यंत कम हो रही है। कालेजों की घातक जड़ता चिंता का विषय बना हुआ है। ऐसी स्थिति में बिहार की राजधानी में स्थित काॅलेज आॅफ कामर्स, आट्र्स एण्ड साइंस परिसर का जीवंत वातावरण शिक्षा को लेकर निराशा से थोड़ी राहत देता है। पहले यह महाविद्यालय मगध विश्वविद्यालय के अधीन था। अब यह महाविद्यालय नवस्थापित पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय की शान बढ़ा रहा है। यहां होने वाले राष्ट्रीय संगोष्ठियांे की चर्चा बिहार के बाहर के अकादमिक जगत में हो रही है। शोध व नवाचार के क्षेत्र में भी यह महाविद्यालय महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
काॅलेज ऑफ़ काॅमर्स, आर्ट्स एण्ड साइंस, पटना की स्थापना सन् 1949 में एक पवित्र उद्देश्य से किया गया था। समाज के अंतिम पंक्ति तक के लोगों तक बिना किसी सामाजिक, सांस्कृतिक एवं आर्थिक भेदभाव के गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध करवाना एक मुख्य उद्ेश्य रहा है। लगभग सात दशकों की शैक्षणिक यात्रा के क्रम में इस संस्थान ने अपनी एक अलग पहचान बनाई है। बिहार प्रांत का यह एकमात्र ऐसा उच्च शिक्षा संस्थान है, जहाँ इंटरमीडियट से लेकर स्नातकोत्तर तक साइंस, कला, वाणिज्य, विधि एवं लगभग 14 व्यावसायिक पाठ्यक्रमों की पढ़ाई होती हैं।
इस संस्थान में 125 शिक्षक और लगभग 100 शिक्षकेतर कर्मचारी कार्यरत हैं। महाविद्यालय उच्च शिक्षा तथा शोध के स्तर में अपनी उत्कृष्टता को लगातार साबित करता रहा है। इसी के परिणामस्वरूप नैक द्वारा महाविद्यालय को ग्रेड ’ए’ प्रदान किया गया है। मालूम हो कि अब तक पूरे बिहार में नैक द्वारा इस महाविद्यालय के अलावा मात्र छह अन्य महाविद्यालयों को ग्रेड ’ए’ श्रेणी प्रदान किया गया है। यह महाविद्यालय वत्र्तमान में पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय की एक अंगीभूत इकाई है।
स्थापना के समय से ही महाविद्यालय का उद्ेश्य एक विशिष्ट शैक्षणिक संस्थान के रूप में अपने को स्थापित करना रहा है। हमारा महाविद्यालय युवाओं में उच्च स्तर का नैतिक मूल्य विकसित करने में सदैव अग्रणी रहा है।
वर्तमान समय में महाविद्यालय का चातुर्दिक विकास हो रहा है। शोध के क्षेत्र में इस महाविद्यालय का प्रदर्शन राष्ट्रीय स्तर का रहा है। वर्तमान में सभी संकायों में शोध परियोजनाएँ चल रही हैं। उदाहरण स्वरूप विज्ञान संकाय में यूजीसी द्वारा प्रदत्त एक शोध कार्य “बिहार में जल से आरसेनिक और फ्लोराइड के स्तर को कम करने हेतु नैनो कण विकसित करने का कार्य“ हमारे महाविद्यालय में किया जा रहा है। इसी प्रकार कला संकाय में इतिहस विभाग द्वारा शोध कार्य चल रहा है।
महाविद्यालय में बिहार सरकार के सात निश्चय कार्यक्रम के तहत C.M. SC/ST योग्यता संवर्द्धन का कार्यक्रम चल रहा है। यह एक अनोखा कार्यक्रम है। यूजीसी ने महाविद्यालय को “कम्युनिटी काॅलेज“ का दर्जा देते हुए तीन कार्यक्रमों- टैली, जीएसटी एवं रीटेल सेल्स में प्रशिक्षण देने हेतु चयन किया है।
महाविद्यालय में विधि संकाय की पढ़ाई भी 1962 से हो रही है। विधि के छात्रों एवं अध्यापकों द्वारा विधिक शिक्षा, विधिक जागरूकता, लोक अदालत, मध्यस्तता आदि विभिन्न कार्यक्रम चलाये जा रहे हैं। विधि संकाय के इस महाविद्यालय के छात्र रहे लोग विभिन्न न्यायालयों के न्यायाधीश के साथ-साथ विभिन्न उच्च पदों पर कार्यरत हैं।
महाविद्यालय लगातार राष्ट्रीय एंव अंतर्राष्ट्रीय स्तर का काॅन्फ्रेन्स, सेमिनार, संगोष्ठी, कार्यशाला आदि आयोजित करता रहा है। इसके अलावा महाविद्यालय राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त विषय विशेषज्ञों के व्याख्यान आयोजित करता रहा है। पिछले एक वर्ष में महाविद्यालय ने कई शैक्षणिक कार्यक्रम किये है, जो निम्नांकित है।
- टाटा इन्सटीच्यूट आॅफ सोसल साईसेज हैदराबाद के कल्पना कन्नावीरन द्वारा प्कमं व िश्रनेजपबम विशय पर व्याख्यान।
- निदेशक बैकिंग, भारत सरकार, नई दिल्ली के श्री सुधीर श्याम द्वारा “बजट“ पर व्याख्यान
- फेडरल रिर्जव सिस्टम, यूएसए के प्रधान अर्थशास्त्री डाॅ. नीतीश रंजन सिन्हा द्वारा ईकोनोमिक फेारकास्टिंग पर व्याख्यान।
- युनिवर्सिटी आॅफ रोचेस्टर के प्रो. अलेकजेन्डर ली द्वारा उपनिवेशवाद पर व्याख्यान।
- नेशनल कान्सिल आॅफ एपलाईड इकोनोमिक रिर्सच, नई दिल्ली के डाॅ. दिलीप कुमार द्वारा पर्यावरण पर व्याख्यान।
- मैडेन स्कूल आॅफ विजनेस न्यूयार्क (यूएसए) के प्रो. चन्दन झा द्वारा राजनीतिक पार्टियों में भ्रष्टाचार पर व्याख्यान।
- यू.जी.सी. द्वारा डिपार्टमेन्ट आॅफ एटोमिक इनर्जी “भारत सरकार के सी.एस. आर, इंदौर में वैज्ञानिक डाॅ. रामजनय चैधरी द्वारा Spintronics पर व्याख्यान।
- डेवलपमेन्ट मैनेजमेन्ट इन्सट्ीच्यूट पटना के निदेशक एच. राव हनुमानकर द्वारा गाँधीयन दर्शन पर व्याख्यान
- पटना विश्वविद्यालय के अवकाश प्राप्त प्रो. लालजी प्रसाद द्वारा सामजिक विकास में गणित की भूमिका विशय पर व्याख्यान।
- बिहार मैथमेटिकल सोसाइटी द्वारा महाविद्यालय में गणित विशय पर कई कार्यशालाओं का आयोजन।
- विवेकानन्द केन्द्र कन्याकुमारी के अपाध्यक्ष पद्मश्री निवेदिता रघुनाथ द्वारा नारी सशक्तीकरण एवं भारत का विकास विशय पर व्याख्यान।
- बिहार लोक सेवा आयोग द्वारा एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन।
- अमेरिका के योगगुरु स्टीफेन लानडाॅउ उर्फ आचार्य पशुपति द्वारा दो योग कार्यशालाओं का आयोजन।
- “बिहार साइन्स काॅन्फ्रेन्स 2018“ द्वारा एक अन्तर्राष्ट्रीय तीन दिवसीय conference का आयोजन। जिसमें प्रो. विजय भटकर, कुलाधिपति नालन्दा विश्वविद्यालय , प्रो0 एचसी वर्मा, IIT कानपुर, प्रो0 प्रभात रंजन कुलपति, डीवाई पाटिल विश्वविद्यालय पुणे, प्रो0 आरपी कोटनाला, राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला , नई दिल्ली इत्यादि द्वारा व्याख्यान तथा माननीय केन्द्रीय मंत्री भारत सरकार श्री रविशंकर प्रसाद द्वारा इस सम्मेलन का उद्घाटन।
- राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर महाविद्यालय में साहा इन्स्टीच्यूट आॅफ न्युक्लियर फिजिक्स कलकत्ता के अन्तर्राश्ट्रीय ख्याति प्राप्त वैज्ञानिक प्रो. संगम बनर्जी द्वारा व्याख्यान।
- नेशनल इन्स्टीच्यूट ऑफ साईन्सेज इंडिया द्वारा प्रायोजित “हमारे जीवन में विज्ञान“ विशय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन। इस कार्यक्रम का उद्घाटन महामहिम राज्यपाल सह कुलाधिपति बिहार के प्रधान सचिव श्री विवेक कुमार सिंह द्वारा किया गया।
उपरोक्त वर्णित तथ्य यह प्रमाणित करते है कि महाविद्यालय अपनी स्थापना के उद्देश्यों और अपने लक्ष्यों की प्राप्ति तथा उच्च शिक्षा और शोध के स्थापित मानकों पर खरा उतरने के लिए निरन्तर प्रयासरत है।
अमित दूबे