यादवों को लुभाने के चक्कर में वाम कार्यकर्ताओं से दूर हुए कन्हैया
पटना/बेगूसराय : बिहार में जहां एक ओर महागठबंधन की मुश्किलें खत्म होने का नाम नहीं ले रहीं, वहीं भाकपा जिसने बेगूसराय सीट से कन्हैया कुमार को उतारा है, वह भी अंदरूनी कलह से जूझने लगी है। इसकी वजह यह है कि भाकपा की केंद्रीय कमेटी बिहार में सिर्फ एक लोकसभा सीट पर प्रत्याशी खड़ा करने का मन बना चुकी है। जबकि राज्य कमेटी और भाकपा कार्यकर्ताओं की मांग है कि पार्टी बिहार में कम से कम 4 सीटों पर चुनाव लड़े। कन्हैया की नजर बेगूसराय में यादव वोट बैंक पर है। लेकिन इस चक्कर में उन्होंने लेफ्ट के जमीनी कार्यकर्ताओं को नाराज कर दिया।
क्या है भाकपा का महागठबंधन को समर्थन का दांव
बेगूसराय सीट से चुनाव लड़ने की घोषणा करते वक्त कन्हैया कुमार ने कहा था कि देशहित में उनकी पार्टी बिहार में बाकी 39 सीटों पर महागठबंधन का समर्थन करेगी जो बात पच नहीं रही। ज्ञात हो कि तमाम अटकलों के बावजूद महागठबंधन में राजद ने कन्हैया कुमार को बेगूसराय सीट से टिकट नहीं दिया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तेजस्वी को युवाओं का एकमात्र विकल्प बनाये रखने की कवायद के लिए ये फैसला लिया गया।
भाकपा कार्यकर्ताओं का खुला विरोध
दरअसल, कन्हैया कुमार की नजर बेगूसराय में मौजूद यादव वोटरों पर है। बेगूसराय सीट पर भूमिहार, मुस्लिम और यादव वोटरों की संख्या सबसे अधिक है। कन्हैया का मानना है कि उनका पैतृक जिला होने की वजह से वहां की भूमिहार जनता उन्हें एनडीए प्रत्याशी गिरिराज सिंह से ज्यादा तवज्जो देगी। भाकपा के राज्य कमेटी सदस्यों ने केंद्रीय कमेटी को पत्र लिखकर सामूहिक इस्तीफे की धमकी दे डाली है। मधुबनी और मोतिहारी राज्य कमेटी के कार्यकर्ताओं ने बकायदा इस फैसले का विरोध भी किया है।
(सत्यम दुबे)