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महाराष्ट्र में फिर सियासी करवट, साथ आयेंगे उद्धव, भाजपा और शिंदे गुट!

नयी दिल्ली : महाराष्ट्र की राजनीति एक बार फिर सियासी करवट लेने वाली है। खबर है कि भाजपा और उद्धव ठाकरे नीत शिवसेना एकबार फिर साथ आयेंगे। इसमें शिवसेना के शिंदे गुट के भी अपनी पुरानी पार्टी में लौटने की चर्चा है। इस प्रकार के कयासों तब और बल मिला जब अपने मुखपत्र सामना में लिखे एक लेख में उद्धव ठाकरे ने इसके संकेत दिये और स्पष्ट लिखा कि वे भाजपा के साथ सुलह का स्वागत करेंगे। भाजपा नेता और डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस ने भी हाल में दिवाली पर हुए एक कार्यक्रम में बयान दिया था कि आज की राजनीति में कड़वाहट खत्म करने की जरूरत है।

फडणवीस के इसी बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए अपने अखबार में उद्धव ने यह लेख लिखा। उन्होंने इसमें फडणवीस से कहा कि अगर आपके मन में ऐसा ख्याल आया है तो तुरंत इसकी पहल कीजिए। साफ है कि ये सारे बयान दोनों तरफ की उस बेकरारी को प्रतिबिंबित करते हैं जिसमें भाजपा और उद्धव ठाकरे एकदूसरे से अलग होकर भी चैन से नहीं है। दोनों ही पार्टियां महाराष्ट्र में एकदूसरे की जरूरत भी हैं और एकदूसरे की पूरक भी हैं। शिंदे गुट भी अपने मंत्रियों की आपसी खटपट से काफी असहज है। ऐसे में शिंदे गुट के लिए भी अपने पुराने घर से जुड़ना मजबूरी बनता जा रहा है क्योंकि तभी वे एकजुट भी रह सकते हैं और उनका राजनीतिक अस्तित्व भी बरकरार रह सकता है।

उधर शिवसेना में दो फाड़ के बाद से ही उद्धव ठाकरे भी काफी असहज हैं। जिद के कारण उनका सबकुछ छिन गया है। ठाकरे भाजपा और शिंदे सरकार के खिलाफ लगातार हमलावर रहे हैं। लेकिन इसी लड़ाई के चलते ठाकरे को न सिर्फ सीएम पद छोड़ना पड़ा बल्कि, वर्षों पुरानी शिवसेना पार्टी के नाम से भी हाथ धोना पड़ा। उद्धव हाल तक भाजपा पर शिवसेना को तोड़ने के आरोप लगाते रहे हैं। अब ऐसे में उद्धव ठाकरे का ताजा बयान उनके अपनी मूल जड़ हिंदुत्व की ओर लौटने और फिर पुराने और नैसर्गिक सहयोगी के साथ मिलकर काम करने और वजूद बचाने की मजबूरी के तौर पर देखा जा रहा है।