नयी दिल्ली/बीजिंग : लद्दाख में भारत-चीन तनाव के बीच भारत सरकार ने टिकटॉक समेत चीन के 59 ऐप्स पर बैन लगा दिया है। बैन किये गए ऐप्स में टिकटॉक, यूसी ब्राउजर, हेलो और शेयर इट जैसे पॉपुलर ऐप्स शामिल हैं। मोदी सरकार के इस ताजा हमले से चीन तिलमिला गया है। इससे उसे करीब 100 करोड़ की आय पर चोट पहुंची है। चीन की सरकारी मीडिया ग्लोबल टाइम्स ने भारत के कदम को अमेरिका की नक़ल करने वाला करार देते हुए कहा कि वह चीन की वस्तुओं के बहिष्कार के लिए अमेरिका जैसे ही बहाने ढूंढ रहा है।
देश की सुरक्षा को ध्यान में रखकर उठाया कदम
चाइनीज एप्स पर बैन लगाते हुए भारत ने तर्क दिया है कि इन चाइनीज ऐप्स के सर्वर भारत से बाहर मौजूद हैं और इनके जरिए यूजर्स का डेटा चुराया जा रहा था। भारत सरकार ने स्पष्ट कहा है कि इन ऐप्स से देश की सुरक्षा और एकता को खतरा बना हुआ था, इसलिए ही इन्हें बैन करने का फैसला लिया गया है।
किस चाइनीज एप के भारत में कितने यूजर्स
जानकारी के अनुसार भारत में करीब 30 करोड़ यूजर्स चाइनीज ऐप का इस्तेमाल करते हैं। भारत में अकेले टिकटॉक के 20 करोड़ यूजर्स हैं। मंथली एक्टिव यूजर्स 12 करोड़ हैं। इसके अलावा 13 करोड़ भारतीय uc browser इस्तेमाल करते हैं। Cam Scanner के 10 करोड़ यूजर्स हैं। 8 करोड़ यूजर्स MI Community के हैं। जबकि Shareit के 20 करोड़ एक्टिव यूजर और Helo के 5 करोड़ एक्टिव यूजर हैं।
जवानों पर हमला और व्यापार साथ नहीं चलेगा
भारत ने इस कदम के साथ यह स्पष्ट संकेत चीन को दे दिया है कि एक तरफ सीमा पर तनाव और हमले तथा दूसरी तरफ हमारी मार्केट से कमाई, दोनों साथ—साथ नहीं चल सकते। चीन के TikTok, Helo और Likee जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स भारत में काफी मशहूर हैं। लेकिन अब जब 59 चाइनीज ऐप का इस्तेमाल भारतीय यूजर्स बंद करेंगे तो ड्रैगन के रेवेन्यू में खासा नुकसान होगा। ये कंपनियां यूजर्स को बीच बीच में ऐड दिखाती हैं, इनसे ही इनकी कमाई होती है। लेकिन जब यूजर्स गायब हो जाएंगे तो रेवेन्यू पर काफी चोट पहुंचेंगी।
भारत में क्या है इन चाइनीज एप की कमाई
भारत में इस वक्त कमाई के मामले में चाइनीज एप टिकटॉक सबसे आगे है। पिछले वर्ष कंपनी ने भारत में अक्टूबर से दिसंबर 2019 के बीच महज तीन महीनों में 50 करोड़ रुपए का रेवेन्यू कमाया था। जबकि इस साल कंपनी ने अप्रैल से सितंबर के बीच 100 करोड़ रुपए की रेवेन्यू का लक्ष्य रखा था।
बहरहाल, भारत के इस ताजा कदम का असर दिखना शुरू भी हो गया है। खास बात यह कि भारतीयों पर इन ऐप के ना होने से कोई असर नहीं पड़ेगा। जो यूजर्स इन ऐप का इस्तेमाल करते हैं, उन्हें दूसरा विकल्प मिल जाएगा। इसके अलावा यह मौका भारतीय डेवलपर्स के लिए भी काफी अच्छा साबित हो सकता है। इस बैन के बाद मेक इन इंडिया ऐप्स को भी बढ़ावा मिलेगा। इसके लिए मित्रो और चिंगारी जैसे विकल्प भी पहले से मौजूद हैं। लेकिन चीन के लिए अब बड़ी मुश्किल खड़ी हो जाएगी क्योंकि पश्चिमी देश पहले से ही उसे अपने यहां से आउट करने का मूड बना चुके हैं। वहीं एशिया के सबसे बड़े बाजार भारत से उसने बखेड़ा खड़ा कर अपने आर्थिक हितों को भारी खतरे में डाल लिया है।