पटना: अक्टूबर- नवंबर में विधानसभा चुनाव न कराने की विपक्ष की दलील को लेकर सुशील मोदी ने बुधवार को कहा कि कोरोना संक्रमण रोकने के लिए भारत ने सबसे पहले चार चरणों का लॉकडाउन कर दुनिया को राह दिखायी। लेकिन, 69 दिनों के बाद प्रधानमंत्री ने “जान भी, जहान भी” के मंत्र के साथ आर्थिक गतिविधियों को अनलॉक करने की शुरुआत भी की। इस दौर में काम मिलने से गरीबों-मजदूरों को राहत मिली।
जब कोरोना के साथ जीने की पूरी तैयारी की जा चुकी है, रेलवे, घरेलू उड़ान, होटल और पर्यटन जैसे क्षेत्र भी एहतियात के साथ खोले जा रहे हैं, तब बिहार विधानसभा के चुनाव क्यों नहीं कराये जाने चाहिए?
जिन लोगों ने अपने राज में नरसंहारों और हत्याओं के खूनी दौर में भी चुनाव टालने की नहीं सोची, वे आज एक लोकतांत्रिक प्रक्रिया को रोकने के लिए दबाव बना रहे हैं।
सुशील मोदी ने कहा कि विधानसभा चुनाव की तैयारी को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ने जो जानकारियां दी हैं, वह मतदाताओं का भरोसा बढ़ाने वाली हैं। आयोग ने आश्वस्त किया है कि कोरोना काल के सभी दिशा-निर्देशों का पालन किया जाएगा, शारीरिक दूरी बरतने के लिए 33,797 अतिरिक्त पोलिंग स्टेशन बनाये जाएंगे।
वोटिंग और रैली के नियम बदलेंगे। सभी दल उस डिजिटल माध्यम से प्रचार कर सकेंगे, जो कम खर्चीला और इको-फ्रेंडली है। आयोग मताधिकार, लोकतंत्र और मतदाताओं की सुरक्षा के लिए हर संभव उपाय कर रहा है, लेकिन संवैधानिक संस्था पर अविश्वास करने वाले दल पराजय के डर से चुनाव का विरोध कर बिहार को राष्ट्रपति शासन के हवाले करना चाहते हैं।
लॉकडाउन में सभी को सहयोग करना चाहिए
अनलॉक- 2 के दौरान मास्क पहनने और शारीरिक दूरी रखने में जितनी सावधानी बरती जानी चाहिए थी, उसमें शिथिलता के कारण हाल के दिनों में संक्रमित लोगों की संख्या अचानक बढ़ी। ऐसे में पटना और भागलपुर में सात दिन का लॉकडाउन लागू किया गया। इस प्रशानिक पहल में सभी को सहयोग करना चाहिए ।