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तो विदेशी अखबार की रिपोर्ट से चलेगा देश? पेगासस की टाइमिंग और राहुल की बैटिंग का जानें राज

नयी दिल्ली : भारत में एक बार फिर जासूसी स्पाइवेयर पेगासस को लेकर हंगामा मच गया है। हालांकि ताजा हंगामे की विश्वसनीयता की जड़ें एक विदेशी अखबार की रिपोर्ट में है। लेकिन भारतीय विपक्ष इसके लिए अपने देश की सुरक्षा और चिंताओं को भी ताख पर रखने को आतुर है। कारण उसे मोदी विरोध में एक और ऐसा मुद्दा मिलने की आस जगी है जिसका उपयोग कर वह केंद्र सरकार को लेकर जनता को शायद कुछ समझा सकें।

क्या है ताजा विवाद जिसपर मचा हंगामा

अमेरिकी अखबार ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ में दावा किया गया है कि इजराइली स्पाइवेयर पेगासस और एक मिसाइल प्रणाली भारत-इजराइल के बीच 2017 में हुए दो अरब डालर के डील में भारत ने खरीदे थे। पांच राज्यों में चुनाव के ठीक पहले हुए इस खुलासे के बाद से विपक्षी दलों ने मोदी सरकार को निशाने पर लेने में देर नहीं की। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि मोदी सरकार ने देशद्रोह किया है।

तीसरे विश्वयुद्ध की कगार पर खड़ा विश्व

यहां गौर करने वाली बात यह है कि न तो भारत सरकार और न इजरायल की सरकार ने ऐसे किसी डील की तस्दीक की है। यानी सबकुछ महज एक तीसरे देश के एक अखबार की रिपोर्ट पर आधारित है। विश्व की ताजा उथल—पुथल पर गौर करें तो इस समय यूक्रेन संकट के कारण रूस और अमेरिका आमने सामने हैं। कभी भी तीसरे विश्वयुद्ध के हालात बन सकते हैं। अमेरिका भारत को इस मुद्दे पर अपने साथ लाना चाहता है। लेकिन भारत चीन को बैलेंस करने के लिए पुराने मित्र रूस का साथ नहीं छोड़ सकता। फिर अमेरिका की भारत के प्रति विश्वसनीयता भी आजमायी हुई नहीं है।

हामिद अंसारी के नक्शे कदम पर राहुल

साफ है कि पीएम मोदी के आगे जिस भारतीय विपक्ष को कुछ सूझ नहीं रहा, उसे इन अंतर्राष्ट्रीय पचड़ों या देशहित से क्या मतलब। राहुल गांधी हों या कोई और पार्टी या नेता, उन्हें तो बस कुछ बोलने का मुद्दा होना चाहिए। ऐसी ही एक कोशिश हाल में देश के पूर्व उपराष्ट्रपति और कांग्रेस नेता रह चुके हामिद अंसारी के एक कृत्य में भी देखने को मिला। श्री अंसारी ने आमेरिका से संचालित एक कार्यक्रम में वर्चुअली शिरकत करते हुुुुुुुुए भारत की धर्मनिरपेक्षता पर ही सवाल उठा दिया। श्री अंसारी 10 वर्ष तक उपराष्ट्रपति रहे। लेकिन तब उन्हें कोई दिक्कत नहीं हुई। पर अब वे विदेशियों के साथ मिलकर देश पर हमले कर क्या कहना चाह रहे, यह समझ से परे है। शायद इसी तरह की भ्रांति हमारे विपक्ष की भी है।