समस्तीपुर : समस्तीपुर संसदीय उपचुनाव में बिहार में दलित राजनीति के नायक रहे रामविलास पासवान का फारवर्ड प्रभाव का लाभ उनके भतीजे प्रिंस पासवान को मिलने की संभावना प्रबल हो गयी है। कारण-समस्तीपुर तो उनके परिवार की पारंपरिक सीट रही ही है, उनके द्वारा उंची जातियों की अब तक की जा रही राजनीति का लाभ भी प्रिंस को मिल सकता है। हालांकि कांग्रेस प्रत्शशी डा. अशोक कुमार की फारवर्डाें में पैठ भी उन्हें टक्कर देगी पर, हाल के दिनों में लोजपा का भाजपा को किए जा रहे भरपूर सहयोग का लाभ भी मिलने लगा है।
यही कारण है कि भाजपा ने अपनी पूरी शक्ति लगाते हुए एलाएंस पार्टियों की ताकत भी इस चुनाव में झोंक दी है। डिप्टी मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी और लोजपा के सांसद चिराग पासवान का दो दिनों पहले वहां संयुक्त रोड शो हुआ और जद-यू के विधायक व लोजपा विधायक राजू तिवारी ने वहां संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस कर प्रिंस के पक्ष में मतदान की अपली की।
अशोक को राजद से उम्मीद
उधर, अशोक राम के पक्ष में राजद के नेताओं और कांग्रेस के मदन मोहन झा, अखिलेश कुमार सिंह सहित कई नेताओं ने कांग्रेस प्रत्याशी के पक्ष में मदान की अपील करते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को भाजपा की कमियों को गिनाते हुए मतदान की अपील की है।
वैसे, रामचन्द्र पासवान के असामयिक निधन के बाद प्रिंस के पक्ष में सहानुभूति की लहर भी उमड़ने लगी है। वैसे प्रिंस की अपनी युवा छवि भी वहां काम करने लगी है। प्रिंस को राजनीति विरासत में मिली है। कारण-एक ओर उनके चाचा राम विलास पासवान और पिता राम चन्द्र पासवान राजनीति में सक्रिय भूमिका में रहे हैं, बिहार की राजनीति के धुरंधर नेता रहे हैं। पासवान फैमिली का बिहार की राजनीति में दबदबा का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि करीब तीन दशक से राज्य व केन्द्र की राजनीति उनको इग्नोर नहीं कर पायी है। सो, प्रिंस के लिए रास्ता आसान लग रहा है।