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15 को ही दही-चूड़ा, मकर संक्रांति पर न रखें कोई कन्फ्यूजन

पटना : हर साल की भांति इस वर्ष भी दही-चूड़ा यानी मकर संक्रांति की तारीख को लेकर लोगों में बहुत कन्फ्यूजन है। मकर संक्रांति का पर्व सूर्य के धनु राशि से निकल कर मकर राशि में प्रवेश के साथ प्रारंभ होता है। जब तक सूर्य धनु राशि में रहते हैं, तब तक खरमास माना जाता है। इस बार 14 जनवरी की रात्रि 8:46 बजे सूर्य धनु से मकर राशि में प्रवेश करेंगे। अत: मकर संक्रांति उदया तिथि 15 जनवरी को मनाई जाएगी।

जब तक सूर्य धनु राशि में तब तक खरमास

पटना बोरिंग रोड के जोतिषाचार्य पं नीरज मिश्रा के अनुसार पंचांग की गणना यह बता रही है कि 14 जनवरी की शाम तक सूर्य धनु राशि में रहेगा। मतलब तब तक खरमास ही रहेगा। इसलिए मांगलिक कार्यो की शुरुआत 15 जनवरी से प्रारंभ होगी। पं नीरज मिश्रा ने बताया कि सूर्य का एक राशि से दूसरी राशि में गमन संक्रमण कहलाता है। सूर्य प्रतिवर्ष 14 जनवरी को राशि परिवर्तन कर दक्षिणायन से उत्तरायण होकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं। इसलिए मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है।

उदया तिथि से 15 जनवरी को मकर संक्रांति

भारतीय ज्योतिष में मकर राशि का प्रतीक घड़ि़याल माना जाता है। हिन्दू धर्म में मकर (घड़ि़याल) को एक पवित्र जीव माना जाता है। हिन्दुओ के अधिकांश देवताओं का पदार्पन उत्तरी गोलार्ध में ही हुआ है, और भारत भी उत्तरी गोलार्ध में ही है। इसलिए मकर संक्राति के दिन सूर्य की कक्षा में हुए परिवर्तन को अन्धकार से प्रकाश की ओर हुई गति मानी जाती है। मकर संक्रांन्ति से ही दिन के समय में वृद्धि होती है और रात्रि का समय छोटा होता जाता है। यही कारण है कि मकर संक्राति को एक पर्व के रूप में मनाने की व्यवस्था हमारे मनीषियों द्वारा की गई।

ज्योतिर्विद से जानें इस दिन के दान-पुण्य

ज्योतिर्विद नीरज मिश्रा के अनुसार इस दिन स्नान-दान एवं सूर्य की पूजा करने से जातक को पुण्य की प्राप्ति होती है। धर्मग्रंथों में कहा गया है कि इस दिन तिल का दान करने से अक्षत पुण्य मिलता है। अत: इस दिन तिल और गुड़ का प्रसाद बांटा जाता है। कई जगहों पर इस दिन खिचड़ी का भोग भी लगाया जाता है। पितरों की पूजा के लिए भी ये दिन पुण्य फलदायी माना गया है।
ज्योतिर्विद
नीरज मिश्रा