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क्या नीतीश को ‘राष्ट्रपति मैटेरियल’ का लॉलीपॉप दिखा खुद ‘पीएम मैटेरियल’ बनना चाहते थर्ड फ्रंट क्षत्रप?

नयी दिल्ली : थर्ड फ्रंट बनाने की आपाधापी में विपक्षी दलों के सभी क्षेत्रीय क्षत्रप पीएम मैटेरियल के नाम वाली तथाकथित ‘पोस्ट’ को खाली करने की कवायद में जुट गए हैं। यह ‘पोस्ट’ फिलहाल जदयू सुप्रीमो नीतीश कुमार के पास है, जो पाला बदलकर फिर एनडीए में जाने का उन्हें दर्द दे चुके हैं। अब विपक्षी नेता एक बार फिर नीतीश को अपने पाले में करने की रस्साकशी कर रहे हैं। इसके लिए वे पीएम मैटेरियल नीतीश को प्रोन्नति देकर ‘राष्ट्रपति पद’ का मैटेरियल वाला आफर ले आये हैं।

एक्टिव हुए केसीआर और प्रशांत किशोर

​थर्ड फ्रंट को आकार देने की कमान तेलंगाना सीएम केसीआर ने थाम रखी है। उन्हें ममता, उद्धव, तेजस्वी और अखिलेश यादव समेत कई क्षेत्रीय दलों के नेताओं की हरी झंडी मिली हुई है। केसीआर के हवाले से आज खबरें भी चलीं कि विपक्ष नीतीश कुमार को राष्ट्रपति चुनाव लड़ाना चाहता है। इस सारे घटनाक्रम में चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर भी काफी सक्रिय जिनकी हाल ही में नीतीश से मुलाकात हुई है।

नीतीश को साधकर एक तीर से दो शिकार

तीसरे मोर्चे की सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि यहां सब कोई प्रधानमंत्री बनना चाहता है। सभी दलों के नेता खुद को पीएम मैटेरियल मानते हैंं। लेकिन यहां भी मारामारी है क्योंकि एक तो संख्याबल नहीं है, दूसरे पीएम मैटेरियल वाले ‘पोस्ट’ पर भी नीतीश कुमार पहले से काबिज हैं। ऐसे में ममता, केसीआर, शरद पवार आदि तमाम विपक्षी नेताओं ने सबसे पहले इस पोस्ट को ही वैकेंट करने की नीति बनाई। नीतीश कुमार को अपने पक्ष में कर उन्हें राष्ट्रपति पद आफर करना। इससे मैटेरियल वाली पोस्ट भी खाली हो जाएगी और उनका संख्याबल भी मजबूत हो जाएगा।

डोलड्रम में फंसे बिहार के मुख्यमंत्री

जब केसीआर ने नीतीश कुमार के पास ममता के चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर को भेजा तब उनकी मुलाकात ने थर्ड फ्रंट के दावों और मूव की हवा गरम कर दी। लेकिन नीतीश कुमार इसपर अभी कुछ भी बोलने से बच रहे हैं। फिलहाल वे डोलड्रम वाले हालात में हैं। नीतीश की एक चाहत एनडीए में अटल—आडवाणी काल की प्रतिष्ठा फिर पाने की भी है। पीएम मोदी ने भी हाल ही में नीतीश को समाजवादियों में सर्वश्रेष्ठ नेता बताया था। ऐसे में नीतीश कुमार को एनडीए के अगले उपराष्ट्रपति उम्मीदवार के रूप में देखा जा रहा है।

थर्ड फ्रंट की कोशिशों से अनजान

साफ है कि एनडीए के कन्फर्म उपराष्ट्रपति और थर्ड फ्रंट के अनकन्फर्म राष्ट्रपति मैटेरियल वाले मानसिक द्वंद्व के बीच नीतीश कुमार बुरी तरह डोल रहे हैं। अभी नीतीश कुमार की तरफ से मामले पर महज इतना कहा गया है कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं और इन दावों में दम नहीं है। लेकिन यह माना जा रहा है कि इसकी संभावना काफी कम है कि वो थर्ड फ्रंट का हिस्सा बनें। पांच राज्यों के मार्च में आने वाले नतीजों में भी यदि थर्ड फ्रंट को बढ़त मिलती है तब भी राष्ट्रपति पद पर वे अपने कैंडिडेट की जीत सुनिश्चित नहीं कर सकते।