नयी दिल्ली : कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मोदी सरकार को सत्ता से उखाड़ फेंकने की एक नयी रणनीति का आगाज किया। 14 विपक्षी सांसदों के साथ उन्होंने इसके लिए ब्रेकफास्ट पालिटिक्स को अंजाम दिया। लेकिन उनकी यह कोशिश तब अपने आप में बड़ा सवाल छोड़ गई जब राहुल द्वारा बुलाई गई ब्रेकफास्ट मीटिंग से मायावती की बसपा और केजरीवाल की आम आदमी पार्टी ने दूरी बना ली। राजनीतिक हलकों में मोदी विरोध की जगह इस बात पर बहस चल पड़ी कि राहुल की ‘चाय’ में क्या इतना उबाल है कि वे मोदी सरकार को अस्थिर कर सकें?
राहुल गांधी की ब्रेकफास्ट वाली नई रणनीति
संसद के मॉनसून सत्र में सरकार और विपक्ष के बीच गतिरोध बना हुआ है। इस बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी की अगुवाई में विपक्षी पार्टियों ने विपक्षी एकता को मजबूती देने की कोशिश की। राहुल गांधी ने मंगलवार को विपक्षी पार्टियों को नाश्ते पर बुलाया जिसमें 14 विपक्षी दल के नेता शामिल हुए। इनमें कांग्रेस के अलावा टीएमसी, राजद, शिवसेना, समाजवादी पार्टी, NCP, सीपीआई, सीपीएम, आईयूएमएल, आरएसपी, नेशनल कॉन्फ्रेंस, झामुमो और डीएमके शामिल हुए।
राहुल से बसपा और आप ने किया किनारा
मायावती की बहुजन समाज पार्टी और अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी ने राहुल की ब्रेकफास्ट वाली बैठक से दूरी बनाते हुए इसमें शामिल नहीं होने का फैसला किया। दोनों ही दलों के नेता विपक्षी एकता पर खुलकर तो कुछ नहीं बोले। लेकिन साफ प्रतीत होता है कि राहुल की ब्रेकफास्ट वाली चाय की उन्होंने हवा निकाल दी है। मोदी विरोध के नाम पर जिस राजनीतिक चाय को इस पार्टी में परोसा गया, उसमें उबाल वाली कोई चीज ही नहीं थी। इशारों—इशारों में बसपा ने देश की दूर्दशा के लिए कांग्रेस को सबसे बड़ा जिम्मेवार भी बता दिया।