Swatva Samachar

Information, Intellect & Integrity

Featured Trending बिहार अपडेट संस्कृति

मलमास की पद्मिनी एकादशी पर आज बन रहे कई शुभ संयोग, जानिये व्रत विधि

पटना : हिंदू मान्यताओं और काल गणना के अनुसार आज का दिन बेहद खास है। अधिक मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि होने के साथ ही आज के दिन को पद्मिनी एकादशी और परम एकादशी के तौर पर भी मनाया जाता है। अधिक मास की यह एकादशी तिथि तीन साल बाद पड़ी है और इस अवसर पर कई शुभ संयोग भी बन रहे हैं। मान्यता है कि अधिक मास में पूजा, व्रत और आराधना का फल भी अधिक मिलता है। इसलिए पद्मिनी एकादशी को और भी अधिक प्रभावशाली माना जाता है। एकादशी तिथि भगवान विष्णु को समर्पित है जो सभी जीवो को मोक्ष दिलाते हैं तथा उनकी कृपा से ही यह पूरा संसार चलता है। इस एकादशी में स्वर्ण दान, विद्या दान, अन्न दान, भूमि दान और गौदान किया जाता है। इस एकादशी का व्रत को करने से कई यज्ञों के फल का पुण्य प्राप्त होता है।

अधिकमास एकादशी की कथा

पौराणिक कथा के अनुसार त्रेता युग में कीतृवीर्य नाम का एक राजा था। राजा की हजार रानियां थीं, लेकिन कोई संतान नहीं था। इसलिए राजा बहुत दुखी रहता था और संतान प्राप्ति के लिए कई धार्मिक अनुष्ठान किया करता था। संतान प्राप्ति के लिए उसने एक बार कठोर तपस्या की। दुर्भाग्य से फिर भी उसे कोई पल प्राप्त नहीं हुआ। तब देवी अनुसूया ने राजा को यह उपाय बताया कि आप अधिक मास में आने वाली पद्मिनी एकादशी का व्रत कीजिए। राजा ने अपनी रानी के साथ मिलकर व्रत किया और उसे व्रत के प्रभाव से एक सुंदर और बलशाली पुत्र की प्राप्ति हुई।

एकादशी पूजा की विधि

एकादशी के दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नानादि करें। इसके बाद साफ पीले रंग के वस्त्र पहनें। फिर एक चौकी लेकर उस पर पीले रंग का कपड़ा बिछाएं। फिर उस पर लाल कुमकुम से स्वास्तिक बनाएं। चावल और फूलों से कुमकुम की पूजा करें। इसके बाद चौकी पर भगवान विष्णु की तस्वीर या प्रतिमा रखें। फिर धूप और दीप, अगरबत्ती जलाएं और विष्णु को फूलों का हार चढ़ा कर मस्तक पर चंदन का तिलक लगाएं। साथ ही भगवान विष्णु को उनका अत्यंत प्रिय तुलसी पत्र भी अर्पित करें। इसके बाद विष्णु चालीसा, विष्णु स्तुति, विष्णु स्तोत्र, विष्णु सहस्त्रनाम और परम एकादशी व्रत की कथा पढ़ें। फिर भगवान विष्णु की आरती कर उन्हें भोग लगाएं। इसी तरह व्रत वाले दिन सूर्यास्त होने के बाद भी पूजन करें।

एकादशी शुभ मुहूर्त

एकादशी तिथि आरंभ- 12 अक्टूबर, सोमवार- दोपहर 4 बजकर 38 मिनट से

एकादशी तिथि समाप्त- 13 अक्टूबर, मंगलवार- दोपहर 2 बजकर 35 मिनट तक

पारण मुहुर्त- 14 अक्टूबर, बुधवार- सुबह 06 बजकर 21 मिनट से 8 बजकर 39 मिनट तक