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जयंती विशेष : दीनदयाल के विचार केंद्र में मनुष्य प्रकृति से अलग नहीं

पटना : गीता प्रसाद सिंह गुरुकुल पब्लिक ट्रस्ट एवं स्वामी विवेकानंद एवं स्वामी सहजानंद सरस्वती सेवा संस्थान के तत्वावधान में बुधवार को पंडित दीनदयाल उपाध्याय जयंती का आयोजन आर्यसमाज भवन, बख्तियारपुर में किया गया।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता प्रज्ञा प्रवाह के प्रांत संयोजक कृष्णकांत ओझा ने दीनदयाल के दर्शन को प्रस्तुत करते हुए कहा दीनदयाल के विचार के केंद्र में मनुष्य है। दीनदयाल मनुष्य को हाड़—मांस का ढांचा भर नहीं मानते थे। बल्कि, वे मनुष्य में वे संपूर्णता में देखते थे। उनके अनुसार मुनुष्य शरीर, मन, बुद्धि और आत्मा का संकुल है। मानसिक चेतना आने पर ही मानव का संपूर्ण विकास संभव है। प्रकृति और मनुष्य को अलग करके नहीं देखा जा सकता, क्योंकि मानव प्रकृति के अविभाज्य तत्व है।

समारोह के मुख्य अतिथि झारखंड सरकार के पूर्व मंत्री मथुरा प्रसाद महतो ने कहा कि समाज को रास्ता दिखाने के लिए विशिष्ट जनों का अवतरण होता है। उनका जीवन एवं विचार संकट के समय में समाज व देश का मार्गदर्शन करता है। उन्होंने कहा कि छात्रों को अपने अंदर की शक्ति व प्रतिभा को समझना चाहिए और उसे निखारने का प्रयास किया जाना चाहिए। गरीब परिवार में जन्म लेने वाला बच्चा भी देश के सर्वोच्च पदों पर पहुंच सकता है एवं असाधारण कार्य कर इतिहास का निर्माण कर सकता है।

समारोह की अध्यक्षता करते हुए भारत विकास परिषद् के महामंत्री व विचारक विमल जैन ने कहा कि दीनदयाल जी के सिद्धांत व विचारों को जमीन पर उतारकर समाज में नीचले पायदान पर खड़े लोगों का उत्थान किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि भारत विकास परिषद् द्वारा स्थापित दिव्यांग अस्पताल के माध्यम से विकलांगतामुक्त बिहार का निर्माण किया जाएगा।

वहीं शिक्षक व समाजसेवी उमेश प्रसाद, शिक्षक रामप्रवेश मिश्रा, विमल जैन एवं मथुरा प्रासद महतो को सम्मानित किया गया। डॉ. वाल्मिकी प्रसाद सिंह ने मेधावी छात्रों को पदक एवं प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया। इस अवसर पर गीता स्मृति पुस्तिका का विमोचन किया गया। विधायक रणविजय सिंह उर्फ लल्लू मुखिया विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित थे।