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जानें बिहार में कहां है पानी की जगह एके—47 से भरा कुआं?

पटना/मुंगेर : बिहार में अपराध का ट्रेंड तो बदला ही है, अचानक इसमें इस्तेमाल होने वाले हथियार भी अत्याधुनिक हो गए हैं। हाल के दिनों में बिहार में हत्याएं अब कट्टा की जगह एक—47 से होने लगी हैं। पिछले कुछ महीनों की गतिविधियों पर गौर करें तो अपराध के इस नए ट्रेंड की जड़े मुंगेर में दिखाई देती हैं जहां एक कुएं से पुलिस ने कल देर रात 12 एके—47 बरामद किया। जिले के मुफस्सिल थाना क्षेत्र के बरधे गांव में इस बरामदगी के बाद पिछले डेढ़ माह में मुंगेर से लगभग 30 एके राइफलें बरामद की जा चुकी हैं। साफ है कि जो राइफलें पुलिस की पहुंच से दूर हैं वही बिहार में अपराध के नए ट्रेंड के लिए जिम्मेवार हैं।

मुंगेर में 12 एके 47 राइफलें बरामद

मुंगेर के पुलिस अधीक्षक बाबू राम ने आज यहां बताया कि सूचना के आधार पर बरधे गांव में कुंएं से 12 एके 47 राइफलें बरामद की गईं। इस सिलसिले में पुलिस ने शस्त्र-तस्कर तनवीर आलम को गिरफ्तार किया है। उन्होंने बताया कि मुंगेर जिला पुलिस ने झारखंड के हजारीबाग से हथियार तस्कर तनवीर आलम को गिरफ्तार किया था। उसकी निशानदेही पर बरधे गांव स्थित कुआं से 12 ऐके—47 राइफलें बरामद हुईं।

बरामद हथियारों का जबलपुर कनेक्शन

मुंगेर एसपी के अनुसार तहकीकात में यह बात सामने आयी कि मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित केन्द्र सरकार द्वारा संचालित ‘सेन्ट्र्ल आर्डिनेन्स डीपो’ से वहां के स्टोर प्रभारी की मिलीभगत से वर्ष 2012 से वर्ष 2018 तक कुल सत्तर की संख्या में एके—47 मुंगेर के शस्त्र-तस्करों के हाथों बेची गईं। जबलपुर पुलिस इस मामले में सेन्ट्रल आर्डिनेन्स डीपो के अवकाशप्राप्त आर्मर पुरुषोत्तम लाल दास, उसकी पत्नी चन्द्रावती देवी, पुत्र शीलेन्द्र और सेन्ट्र्ल आर्डिनेन्स डीपो के स्टोर प्रभारी सुरेश शर्मा को पहले की गिरफ्तार कर चुकी है।
पुलिस अधीक्षक का कहना है कि गिरफ्तार शस्त्र-तस्करों ने पुलिस के समक्ष बयान दिया है कि उन्होंने एके 47 राइफल अपराधियों और माओवादियों के हाथों भी बेचे हैं। वे लोग जबलपुर से चार लाख रुपए में राइफल खरीदते थे और मुंगेर में आठ से दस लाख में बेचते थे।