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नाबालिग मोदी खुद को काबिल साबित करने की हड़बड़ी में दिल्ली सरकार को नाकाबिल साबित कर रहे- शिवानंद

पटना : लालू-राबड़ी और मीसा के ठिकानों पर हुई सीबीआई छापेमारी को लेकर राजनीति अभी तक जारी है। भाजपा की तरफ से सुशील मोदी मोर्चा संभाले हुए हैं तो वहीं राजद की तरफ से शिवानंद तिवारी मोर्चा संभाले हुए हैं। दोनों के बीच तथ्य और जुबानी जंग जारी है।

बीते दिन सुशील मोदी ने कहा था कि आज अगर लालू यादव की दुर्दशा के जिम्मेवार वहीं हैं, जिन्होंने पहले मुकदमा दायर किया, ज्ञापन दिया और अब राजनीतिक लाभ के लिए उनके सामने दुम हिला रहे हैं। राजद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवानंद तिवारी ने कम से कम यह स्वीकार तो किया कि ललन सिंह के साथ मिलकर लालू यादव के ‘नौकरी के बदले जमीन’ घोटाले का उन्होंने ही पर्दाफाश किया था और तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मिलकर सीबीआई जांच की मांग की थी।

सुमो के बयान पर पलटवार करते हुए राजद नेता शिवानंद तिवारी ने कहा कि सुशील मोदी की राजनीति अभी तक बालिग नहीं हो पाई। संभवतः इसीलिए इनकी पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने बिहार की राजनीति से उनको अलग किया था। जब दिल्ली ले जाए गए तो उनको उम्मीद थी कि बिहार में इतने लंबे समय तक वित्त विभाग को इन्होंने कुशलता से संभाला है। अब निर्मला सीतारमण की कुर्सी पर सुशील मोदी का बैठना तो पक्का ही है। लेकिन, दिल्ली वालों ने तो इनके हल्केपन को पहचान कर ही बिहार को इनसे मुक्त कराया था। इसीलिए बिहार के मीडिया में बयान देने के लिए ही इनको छुट्टा छोड़ दिया है।

लालू यादव के यहां छापेमारी के मामले में अपने को काबिल साबित करने की हड़बड़ी में सुशील मोदी अपनी दिल्ली सरकार को ही नाकाबिल साबित कर रहे हैं। उनका दावा है कि लालू यादव के खिलाफ सीबीआई जाँच की माँग को मनमोहन सिंह ने दबा दिया था। लेकिन मनमोहन सिंह की सरकार तो 2014 में ही चली गई थी। उसके बाद से अब तक तो यानी आठ वर्षों से तो दिल्ली में बड़े मोदी जी की ही सरकार है। यह सरकार इतनी नाकाबिल है कि छह वर्षों दबे उस ज्ञापन को खोज निकालने में उसको आठ वर्ष लग गए, वह भी कब ! जब नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव के बीच दूरी घटती हुई नज़र आ रही है। हमारा सवाल तो यही था कि लालू यादव के यहाँ सीबीआई की छापेमारी कहीं नीतीश कुमार के लिए चेतावनी तो नहीं थी !