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अग्निपथ के ‘आग’ को इस तरह ठंडा करेगी BJP, सांसद ने कहा – जिसके बदौलत चल रही सरकार वही असुरक्षित

पटना : बिहार में अग्निपथ योजना के विरोध की आग को भाजपा प्रचार -प्रसार और इंटरनेट मिडिया के जरिए ठंडा करेगी। पार्टी ने बिहार के सभी सांसदों, विधायकों, और विधान पार्षदों के साथ प्रदेश पदाधिकारी से लेकर कार्यकर्ताओं तक को यह कहा है कि वह युवाओं को जागरूक करें। इसके साथ ही समाज में द्वेष फैलाने वाले उपद्रवियों पर भी विशेष नजर रखें।

दरअसल, बिहार भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल की अध्यक्षता में भाजपा ने प्रदेश पदाधिकारियों, मंत्रियों व सांसदों की बैठक बुलाई थी। इस बैठक में पार्टी के जनप्रतिनिधियों ने प्रदेशव्यापी उपद्रव, तोडफ़ोड़ और हमले को लेकर नेतृत्व को षड्यंत्र से अवगत कराया। इस दौरान कई जनप्रतिनिधियों ने पुलिस-प्रशासन द्वारा बरती गई कोताही पर नाराजगी जताई।वहीं, इस बैठक के दौरान कई सांसदों और विधायकों का आरोप था कि पुलिस पूरी तरह मूकदर्शक बनी रही।

अग्निपथ योजना की आड़ में उपद्रव बिहार को तबाह करने का षड्यंत्र

भाजपा के सांसदों का कहना था कि अग्निपथ योजना की आड़ में उपद्रव बिहार को तबाह करने का षड्यंत्र था। क्षोभ की बात कि पुलिस-प्रशासन गैर जिम्मेदार बना रहा, अन्यथा उपद्रव पर नियंत्रण पाया जा सकता था। पार्टी के विधायकों का कहना था कि प्रशासन सक्रिय रहा तो शनिवार छिटपुट घटनाओं को अलावा बहुत कुछ देखने को नहीं मिला। यह पूरी तरह एक साजिश है। जिसके बाद अध्यक्ष ने कहा कि जो हो रहा है उसको लेकर सभी लोगों को खुद सामने आना होगा और इंटरनेट मीडिया के जरिए प्रचार प्रसार कर युवाओं को इस योजना के बारे में बेहतर ढंग से बताना होगा।

हमलोग सरकार में हैं या विपक्ष में यह समझ में नहीं आ रहा

वहीं, दूसरी तरफ एक सांसद ने मीटिंग में एनडीए को लेकर सबसे बड़ी बात बोली है। उन्होंने कहा है कि हमलोग सरकार में हैं या विपक्ष में यह समझ में नहीं आ रहा। हमारी बदौलत सरकार चल रही और इसी सरकार में हम लोग असुरक्षित हैं। भाजपा सांसद ने यहां तक कहा कि गाली भी सुनेंगे और ताना भी फिर भी पंच-सरपंच रहेंगे। हालांकि सांसदों की चिंता पर नेतृत्व ने कुछ जवाब नहीं दिया।नेतृत्व की तरफ से कहा गया कि बिहार एनडीए के भीतर ताजा राजनीतिक घटनाक्रम पर दल के अधिकृत व्यक्ति ही पक्ष रखेंगे।

बता दें कि, इससे पहले भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डा. संजय जायसवाल ने एक प्रेस वार्ता कर यह साफ किया था कि उनके ऊपर या फिर उप मुख्यमंत्री रेणु देवी के अलावा पार्टी के अन्य जनप्रतिनिधियों पर हुए हमले के पीछे षड्यंत्र रचा गया है। जिसके बाद जदयू और भाजपा के रिश्तों में और तल्खी आ गई है। क्योंकि, अपने बड़े नेताओं व विधायकों पर हमले के बाद नीतीश सरकार में बड़े दल की भूमिका वाली भाजपा ने आक्रामक तेवर अपना लिया है। साथ ही गृह मंत्रालय ने बिहार भाजपा के 10 नेताओं को सीआरपीएफ की वाई श्रेणी की सुरक्षा दी है। इधर, अपनी ही सरकार में हो रही बेइज्जती से भाजपा काफी गुस्से में है।

बहरहाल, देखना यह है कि की बैठक में जो राय सांसदो, विधायकों और प्रदेश प्रभारियों द्वारा दिया गया उसपर भाजपा किस प्रकार अमल में लाती है। साथ ही अपनी सरकार में सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद भी कब तक चुप चाप सारी चीजों को सहते रहती है।