शराबबंदी के नाम पर यह कैसा गांधीवाद, स्वतंत्र भारत के नाथूराम गोडसे हैं नीतीश- राजद
अगर गांधीजी की परवाह है तो तुरंत त्यागपत्र दें नीतीश कुमार और गोडसेवादियों से लोहा लेकर प्रायश्चित करें
राजद के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रो सुबोध मेहता ने कहा कि नीतीश कुमार आखिर आपने यह परोक्ष रूप से स्वीकार कर ही लिया कि आपकी असफल शराबबंदी एक गरीबबंदी है और उसके अलावा कुछ नहीं! रही बात गांधीजी की तो अगर वे होते तो यह अवश्य कहते कि गोडसे ने तो सिर्फ मेरे शरीर को खत्म किया लेकिन छलिया समाजवादी ने तो मेरे धर्म और मेरी आत्मा की हत्या की है!
राजद प्रवक्ता ने कहा कि वैचारिक स्तर पर देखा जाए तो यह साफ दिखता है कि नीतीश जी ने पिछले पंद्रह वर्षों में भाजपा के साथ जो संगत किया है उससे उनके भीतर का गांधीवाद खत्म हो चुका है और उनके भीतर गोडसे की विचारधारा बड़े तरीके से विकसित हुई है। यदि उन्हें आज के स्वतंत्र भारत का नाथूराम गोडसे कहा जाए तो कोई बड़ी बात नहीं होगी, बल्कि वे मन ही मन यह तमगा पाकर प्रसन्न भी होंगे।
इससे भी बड़ा दुर्भाग्य यह है कि गांधीजी का नाम जपकर नीतीश कुमार जो गोडसेवाद फैला रहे हैं उसकी कीमत गरीबबन्दी के रूप में बिहार की जनता चुका रही है। नीतीश कुमार के खोखले शराबबंदी के नाम पर अब तक साढ़े तीन लाख से ज्यादा लोगों के ऊपर केस दर्ज कर उन्हें जेल भेजा जा चुका है।
विश्वास ही नहीं होता कि नीतीश कुमार उसी चंपारण वाले बिहार के छलिया मुख्यमंत्री हैं, जहाँ से कभी बापू ने सत्याग्रह जैसे पवित्र लोकतांत्रिक परंपरा की शुरुआत की थी। यदि उन्हें जरा भी गांधीजी की परवाह है तो तुरंत त्यागपत्र दें और गोडसेवादियों से लोहा लेकर कुछ प्रायश्चित करें। भोली-भाली जनता को बरगलाना तथा बिहार के विकास से जुड़े वास्तविक मुद्दों से ध्यान हटाने से बाज आएँ नीतीश कुमार।