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RCP की पहल, गोपाल की मेहनत और सीट NDA को…

बिहार विधानसभा उपचुनाव को लेकर मतगणना जारी है। दोनों सीट पर चुनाव लड़ रही जदयू ने एक सीट यानी कुशेश्वरस्थान पर जाट दर्ज कर ली है। जदयू उम्मीदवार अमन भूषण हजारी ने राजद उम्मीदवार गणेश भारती को 12 हजार 698 मतों से पराजित किया है। ज्ञातव्य हो कि यह सीट पहले से ही जदयू के पास थी और यहां से अमन भूषण हजारी के पिता शशिभूषण हजारी विधायक हुआ करते थे। कोरोना के कारण उनका असामयिक निधन हो गया था, जेडीयू ने यह तय किया कि इस सीट पर एनडीए के उम्मीदवार अमन भूषण हजारी होंगे।

संजय का षड्यंत्र!

हजारी की जीत के बाद कुछ लोग इसे नीतीश कुमार की जीत कह रहे हैं, तो वहीं जदयू के एक नेता अपने सामर्थ्य का इस्तेमाल कर यह दिखाने का प्रयास कर रहे हैं कि यह जीत उनकी है। पूरी योजना के तहत जदयू नेता संजय झा यह दिखाने का प्रयास कर रहे हैं कि अमन भूषण हजारी की जीत उनके बगैर संभव ही नहीं था। योजना के तहत संजय झा दरभंगा के तमाम बीजेपी के नेताओं को चुनाव प्रचार से दूर रखा था। भाजपा की तरफ से सिर्फ एक ही नेता दिख रहे थे जीवेश कुमार मिश्रा। इसके अलावा दरभंगा लोकसभा सीट से सांसद और राष्ट्रीय कार्यसमिति के विशेष आमंत्रित सदस्य गोपाल जी ठाकुर को संजय झा ने चुनाव प्रचार से दूर रखा था। क्योंकि, गोपाल जी ठाकुर ने ही संजय झा के लोकसभा जाने के अरमानों पर पानी फेरा था।

स्थानीय नेताओं ने बताई हकीकत

गोपाल जी ठाकुर को दूर रखने के पीछे या कहा जा रहा है कि संजय झा यह नहीं चाहते हैं कि दरभंगा में कोई भी उनके समकक्ष या उनसे बड़ा नेता बने। इसलिए वे गोपाल जी ठाकुर को उपचुनाव में चुनाव प्रचार से दूर रखे हुए थे। लेकिन संजय झा की यह योजना सफल नहीं हो सकी। क्योंकि, जब आरसीपी सिंह कुशेश्वरस्थान में चुनाव प्रचार करने गए, तो वहां के स्थानीय नेताओं ने कहा कि भाजपा के जो सांगठनिक नेता हैं, जो इस क्षेत्र की राजनीति को बारीकी से समझते हैं, उन्हें चुनाव प्रचार से दूर रखा गया है। लिहाजा यह परिणाम जदयू के पक्ष में नहीं आ सकता।

RCP की पहल, गोपाल की मेहनत और सीट NDA को

इसके बाद आरसीपी सिंह एक्टिव हुए और उन्होंने गोपाल जी ठाकुर से संपर्क साधा और कहा कि आपके बगैर यहां का परिणाम हम लोगों के अनुकूल संभव नहीं है। इसके बाद से गोपाल जी ठाकुर को चुनाव प्रचार में शामिल कराया गया। इसके बाद गोपाल जी ठाकुर कुशेश्वर अस्थान विधानसभा सीट के अंतर्गत पूरे क्षेत्र का भ्रमण किया और भाजपा के सभी कार्यकर्ताओं को एक्टिव किया, इसके बाद जाकर धीरे-धीरे माहौल एनडीए के पक्ष में बनना शुरू हुआ। नतीजतन, आरसीपी सिंह की पहल और भाजपा के सांगठनिक क्षमता वाले नेताओं और कार्यकर्ताओं के बदौलत एनडीए को जीत मिली।

सांगठनिक कौशल में गोपाल 20

वहां के स्थानीय कार्यकर्ताओं की मानें तो इसके बाद एक बार फिर संजय झा की तुलना में गोपाल जी ठाकुर 20 साबित हुए और राजनीति के लिए जिस कौशल की अत्यंत आवश्यकता है यानी की सांगठनिक कौशल की, उसमें गोपाल जी ठाकुर से संजय झा आगे नहीं निकल सकते हैं।

ज्ञातव्य हो कि मिथिला क्षेत्र में इस बात की चर्चा होती रहती है कि संजय झा दरभंगा से लोकसभा का सदस्य बनना चाहते हैं। 2019 के आम चुनाव में काफी लोगों को यह लग रहा था कि यह सीट जदयू के खाते में जाएगी और संजय झा यहां से उम्मीदवार होंगे। इसके लिए जदयू के तमाम बड़े नेताओं ने भाजपा से दरभंगा सीट मांगी थी। लेकिन, भाजपा का गढ़ होने के कारण पार्टी ने अपने जमीनी कार्यकर्ता गोपाल जी ठाकुर को यहां से उम्मीदवार बनाया और वे शानदार जीत दर्ज कर लोकसभा पहुंचे।