कैप्टन ने क्यों कहा, सिद्धू स्थिर आदमी नहीं? अब कहां की ठौर लेंगे नवजोत!
नयी दिल्ली : पहले कैप्टन अमरिंदर सिंह की सीएम पद से छुट्टी, फिर चरणजीत चन्नी की ताजपोशी और अब नवजोत सिद्धू का इस्तीफा। पंजाब में कांग्रेस की हालत सांप—छछूंदर वाली हो गई है। राज्य में पांच माह बाद विधानसभा चुनाव होने हैं, और पार्टी आलाकमान के तुगलकी निर्णयों के कारण न कैप्टन अमरिंदर सिंह कांग्रेस में रुकने को तैयार और न ही नवजोत सिद्धू मानने वाले। यही कारण है कि सिद्धू के पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा देते ही पूर्व सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने राहुल और प्रियंका को लक्ष्य कर कह दिया, ‘मैंने पहले ही कहा था वो स्थिर आदमी नहीं है। पंजाब जैसे सीमा से सटे राज्य के लिए सिद्धू फिट नहीं।’ सवाल उठता है कि आखिर दिग्गज नेता ने सिद्धू को लेकर ऐसी कड़ी टिप्पणी क्यों की?
जिम्मेदारी निभाने से ज्यादा ‘छोड़ने’ में यकीन
दरअसल पंजाब कांग्रेस में मची उथल—पुथल के बाद पार्टी कार्यकर्ता से लेकर आम लोग भी यह जानने को उत्सुक हैं कि कैप्टन के कथन के पीछे की वजह क्या है। राजनीतिक टीकाकारों का मानना है कि नवजोत सिद्धू का, चाहे क्रिकेट हो या सियासत की पिच, वे जिम्मेदारी उठाने से ज्यादा उससे बचने या छोड़ने में यकीन रखने वाले शख्स की पहचान रही है। उनका राजनीतिक करियर अभी तक ऐसा ही रहा है।
- 2004 में सिद्धू बीजेपी में आए।
- 2014 में अमृतसर से टिकट नहीं मिला तो नाराज हो गए।
- 2016 में बीजेपी ने राज्यसभा भेजा पर 3 माह में ही इस्तीफा दिया और बीजेपी भी छोड़ी।
- 2017 में सिद्धू ने कांग्रेस का हाथ थाम लिया।
- 2019 में पंजाब की कांग्रेस सरकार में मंत्री पद छोड़ दिया।
- इसी साल जुलाई में पंजाब कांग्रेस की कमान मिली तो 2 माह में ही इस्तीफा दिया।
कैप्टन अमरिंदर ने इसलिए की सख्त टिप्पणी
शायद, कैप्टन अमरिंदर सिंह द्वारा सिद्धू को अस्थिर कहने की वजह भी उनका ‘छोड़ने’ वाला कैरेक्टर ही है। इसके अलावा कैप्टन ने पाक पीएम इमरान खान और जनरल बाजवा से उनकी नजदीकी को भी देशहित के लिए खतरनाक बताया। लेकिन जानकार कहते हैं कि असली कहानी कुछ और ही है। बताया जा रहा है कि सिद्धू सीएम पद नहीं मिलने तथा कैप्टन के करीबियों को चन्नी मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने से नाराज हो गए। एडवोकेट जनरल और डीजीपी की नियुक्ति में भी सिद्धू की नहीं चली। जबकि पंजाब की कमान चन्नी को सौंपे जाने के फैसले को सिद्धू ने अपनी जीत की तरह दिखाया था। तब सिद्धू खुद को सुपर सीएम की तरह प्रोजेक्ट करते हुए सिद्धू चन्नी के कंधे पर हाथ रखकर कई जगह चलते हुए देखे गए। लेकिन चन्नी ने मंत्री पद और अफसरों की तैनाती के मुद्दे पर सिद्धू को चलने नहीं दी।
चन्नी का सीएम बनना नहीं आया रास
इधर कैप्टन को इस्तीफे पर मजबूर कर सिद्धू ने पंजाब में सत्ता का फूल खिलाने की जो कोशिश दिल्ली आलाकमान तक दौड़भाग करके की, उस फूल को चरणजीत सिंह चन्नी राजकुंवर बनकर सिद्धू के सामने से ले गए थे। ऐसे में अतिमहत्वाकांक्षी बताए जाने वाले सिद्धू को जब लगने लगा कि चन्नी ही चेहरा हो चुके हैं तो उन्हें अपना चेहरा पीछे होता दिखने लगा। यही नहीं, आगामी विधानसभा चुनाव के बाद भी पंजाब के सीएम पद मिलना उन्हें मुश्किल लगने लगा। नतीजतन, सिद्धू ने फिर ‘छोड़ने’ वाला कदम उठाया और कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया।
कांग्रेस की उलझन और सिद्धू की महत्वाकांक्षा
मंत्रिमंडल गठन को लेकर राहुल गांधी ने जब चन्नी को बुलाया तो सिद्धू उनके साथ जाना चाहते थे। लेकिन पार्टी हाईकमान ने सिद्धू को मना करके केवल चन्नी को बुलाया। यही नहीं मंत्री पद के लिए सिद्धू की दी गई लिस्ट को भी बदल दिया गया। सिद्धू के विरोध के बावजूद सुखजिंदर सिंह रंधावा को गृह विभाग दिया गया। पार्टी कामकाज में भी सिद्धू के तौर—तरीकों के खिलाफ दिल्ली से लेकर चंडीगढ़ तक विरोध होने लगा। चन्नी के सीएम बनने के बाद सिद्धू ने यह दर्शाना शुरू कर दिया था कि चन्नी उनके कहे में चलेंगे। सार्वजनिक मौकों पर वह जिस तरह चन्नी पर हावी होतो नजर आए, यह कांग्रेस आलाकमान को नागवार गुजरा।