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‘आर्थिक सशक्तीकरण से होगा दलितों का विकास’

पटना : राजधानी के एएन सिन्हा इंस्टीट्यूट में दलित संवाद पर आज एक सेमिनार का आयोजन किया गया। इस सेमिनार को संबोधित करते हुए पटना यूनिवर्सिटी के प्रो. एनके चौधरी ने कहा कि दलितों के लिए सामाजिक मुद्दे महत्वपूर्ण हैं, लेकिन उससे भी ज्यादा जरूरी है कि उनका आर्थिक उत्थान का मार्ग प्रशस्त हो। दलितों के पास रहने के लिए जमीन नहीं है। दस-दस लोग एक ही कमरे में रहने को मजबूर हैं। आए दिन प्रदेश सरकारों द्वारा भूमिहीन दलितों पर रिपोर्ट जारी किए जाते हैं। भारत सरकार भी समय-समय पर भूमिहीन दलितों के आंकड़े पेश करती रहती है। दलित आर्थिक रूप से मजबूत होंगे तभी शिक्षा, नौकरी व्यवसाय पर बढ़-चढ़कर अपनी भागीदारी कायम कर सकेंगे।

सामाजिक भेदभाव बहुत बड़ी समस्या है। इस पर चर्चा-परिचर्चा होती रहनी चाहिए। 1991 के बाद भारत में आर्थिक उदारीकरण का दौर शुरू हुआ। सरकारी नौकरियां कम होती चली गईं। उद्योग और व्यवसाय पर फोकस किया जाने लगा। दलित इसके सबसे बड़े शिकार हुए और उनकी स्थिति बदतर होती चली गई। पटना यूनिवर्सिटी में इतिहास की प्रो. निवेदिता झा ने कहा कि आज का समाज जाति और धर्म मे बंटकर रह गया है। बचपन से हम सभी ऐसे अनुभवों से होकर गुजरे हैं । उन्होंने कहा कि संविधान की नज़र में सब बराबर हैं और दलितों को भी बराबरी का दर्जा दिया जाना चाहिए। वहीं प्रो. प्रोमिला ठाकुर ने कहा कि आज के बदलते दौर में हर जगह परिवर्तन हो रहा है। पहले दलितों को अछूत माना जाता था लेकिन अब ऐसा नहीं है। आज दलित भी शिक्षित हो रहे हैं और धीरे—धीरे समाज की मुख्यधारा में शामिल हो रहे हैं।
मानस दुबे