दरभंगा : आतंकवाद देश, समाज व मनुष्यता के विरूद्ध है और क्षेत्रियता, आर्थिक असमानता, मजहबी कट्टरता आदि कारणों से भारत में पनपा है। समकालीन भारत में कई प्रकार के आतंकी संगठन हैं, पर सबसे अधिक भारत पड़ोसी देश समर्थित आतंकवादियों से पीड़ित रहा है। पाकिस्तान समर्थित आतंकी समूह ‘धर्म खतरे में है कहकर’ आतंक की फसल बोता है और भारत पर इसको थोपता है। आजकल यह कुछ-कुछ आतंकी भेजते रहो, भारत को परेशान करते रहो वाली नीति पर चल रहा है। पर अब देश के कई हिस्सों पर आतंकवाद की समस्या अंडरकंट्रोल है और आतंकी समूहों की नकेल कसी जा रही है। शुक्रवार को उक्त बातें दरभंगा प्रक्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक पंकज दराद ने लनामिविवि के पीजी समाजशास्त्र विभाग एवं महाराजाधिराज कामेश्वरसिंह मेमोरियल चेयर तथा डाॅ. प्रभात दास फाउण्डेशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ‘समकालीन भारत में आतंकवाद’ विषयक सेमिनार को संबोधित करते हुए कहीं।

उन्होंने कहा कि कोई धर्म नहीं कहता है कि आतंक फैलाओ पर जनसमर्थन हासिल करने के लिए इसे धर्म से जोड़ा जाता है। हमारे यहां तो पंडित जी सिर्फ पूजा करा सकते हैं उससे ज्यादा उनका रोल नहीं होता। पर कुछ धर्मो में धर्म गुरूओं का दखल मनुष्य की निजी जीवन तक फैला होता है और आश्चर्यजनक रूप से इसमें पढ़े-लिखे लोग भी शामिल रहते हैं। देश में नक्सलवाद या पंथ के नाम पर चल रहे संगठनों को बाहरी मदद देकर भारत को खंडित करने की कोशिश की जा रही है। आईजी श्री दराद ने खुफिया रिपोर्ट के आधार पर विभिन्न आतंकी घटनाओं आदि का विवरण देते हुए बताया कि नक्सलवाद बिहार के 23 जिलों में फैला रहा है। दरभंगा भी एक दशक पूर्व नक्सल प्रभावित जिलों में गिना जाता था, पर जनसहयोग और अच्छी पुलिसिंग से इस समस्या पर काबू पा लिया गया। फिर दरभंगा माॅडल का आतंकी स्वरूप राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित हुआ जिस पर भटकल की गिरफ्तारी के बाद विराम लगा हुआ है। वस्तुतः देश में हुए विकास से नक्सलवाद-आतंकवाद समाप्ति की ओर है और दहशतगर्दी में कमी आई है। सेमिनार के मुख्य अतिथि कुलपति प्रो. डाॅ सुरेन्द्र सिंह ने कहा कि अपने पंथ, विचार, धर्म के प्रति आत्ममुग्धता एवं दूसरे पंथ, विचार, धर्म के प्रति असहिष्णुता को ही आतंकवाद की संज्ञा दी जा सकती है। आतंकवादियों के समूह में डाक्टर, इंजीनियर, प्रोफेसर आदि जैसे पढ़े-लिखे लोग भी शामिल देखे गये हैं। इसका सबसे बड़ा कारण सकीर्ण सोच को ही माना जा सकता है, जिनकी सोच सकीर्ण होती है वही आत्ममुग्धता के शिकार होकर अपना विचार, अपना एजेंडा आदि दूसरों पर थोपने का प्रयास करते हैं।
कुलपति प्रो. एसके सिंह ने कहा कि वैसे तो समकालीन भारत में आतंकवादी गतिविधियों में कमी आई है पर संचार क्रांति की बदौलत जिस तरह से हर छोटी-बड़ी घटना की सूचना तुरंत प्राप्त हो जाती है उससे ऐसा लगता है कि भारत में आतंकवाद बढ़ गया है। कुलसचिव कर्नल निशीथ कुमार राय ने जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के साये में बिताए लम्हों को रेखांकित करते हुए बताया कि आतंकवाद का स्वरूप धीरे-धीरे बदल चुका है। आतंकवाद क्यों है, क्या है, अगर हम इस पर विचार करें तो स्वतः ही यह स्पष्ट हो जाता है। जिस दिन हमारे देश के लोग अपने अधिकार के साथ-साथ अपने कत्र्तव्य के प्रति भी सचेत हो जायेंगे और देशहित की सोचेंगे, आतंकवाद की समस्या समाप्त हो जायेगी।
इससे पूर्व विषय प्रवेश कराते हुए समाजशास्त्री डाॅ गोपी रमण प्रसाद ने कहा कि आतंकवाद वह मत या सिद्धांत है जो संगठित रूप से भय को माध्यम बनाकर अपने लक्ष्य को प्राप्त करना चाहता है। समाज की संरचना में व्याप्त खामियों को ही इसका मूल कारण माना जाता है। परिवार, जाति, लिंग राजनीतिक, आर्थिक, शैक्षणिक आदि कारणों से इसकी उत्त्पति होती है और इसका परिणाम अत्याधिक घातक होता है। वस्तुतः आतंकवाद समाज की बीमारी है। जिसे समाज को स्वस्थ्य बनाकर ही दूर किया जा सकता है। मानवता भारत जैसे बहु जातीय, बहु संस्कृति जैसे देश में राष्ट्रवाद को दृढ़ आधार बनाकर आतंकवाद को मिटाया जा सकता है।
राजनीतिक विश्लेषक डाॅ. जीतेन्द्र नारायण ने कहा कि समकालीन भारत में आतंकवाद सिमट कर एक राज्य और तीन-चार जिलों तक सीमित हो गया है। पर इसका प्रभाव पूरे देश में है और इसके समर्थक-विरोधी हर जगह मौजूद है। राज्य की व्यवस्था के विरूद्ध संगठित रूप से समानान्तर व्यवस्था, धर्म, नस्ल आदि के आधार पर भय के सहारे खड़ा करना ही आतंकवाद है। अब तो आतंकवाद के अलग-अलग स्वरूपों, धर्मो के नाम पर नाम दिए जा रहे है। समकालीन भारत का पहला आतंकवादी भी घोषित कर दिया गया है। महज किसी की हत्या कर देना आतंकवाद नहीं है। डाॅ. नारायण ने आतंकवाद की पृष्ठ भूमि की गंभीर व्याख्या करते हुए कहा कि आज आतंकवाद पूरे विश्व के लिए चिंतनीय है। पर धार्मिक, राजनैतिक आदि कारणों से इस पर गंभीरता पूर्वक विचार नहीं किया जाता।
सेमिनार की अध्यक्षता करते हुए विभागाध्यक्ष डाॅ. विनोद कुमार चौधरी ने कहा कि बच्चों का सही रूप में समाजीकरण हो और उनमें देशहित की भावना बाल्यावस्था से ही जागृत की जाय तो आतंकवाद की समस्या उत्पन्न ही नहीं होगी। समाज में भाईचारा रहेगा तो आतंकी कहां से आयेगा? अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापन डाॅ. मंजू झा ने दिया और स्वागत डाॅ. विद्यानाथ मिश्र ने किया। संचालन अतिथि शिक्षक डाॅ. शंकर लाल ने किया। मौके पर अंग्रेजी विभागाध्यक्षा डाॅ. अरूणिमा सिन्हा, मैथिली विभागाध्यक्षा डाॅ. प्रीति झा, राजनीति शास्त्र विभागाध्यक्ष रविन्द्र चैधरी, फाउण्डेशन के सचिव मुकेश कुमार झा आदि मौजूद थे।
(शंकर कुमार लाल)