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माया पर कोर्ट सख्त, हाथी की मूर्तियां लगाना पैसे की बर्बादी

नयी दिल्ली/पटना : प्रधानमंत्री बनने का सपना देख रही उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बसपा सुप्रीमो मयावती को सुप्रीम कोर्ट से आज जबरदस्त झटका मिला। दरअसल मुख्यमंत्री रहते हुए मायावती ने नोएडा में अपने पार्टी के चुनाव चिह्न हाथी की मूर्तियां लगवायी थीं। इस मामले को लेकर सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की गयी थी। इस पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने मायावती पर सख्त टिप्पणी कर दी। कोर्ट के अनुसार यह जनता के पैसे की बर्बादी है। लोकसभा चुनाव से ठीक पहले कोर्ट की इस टिप्पणी से मयावती का भविष्य अंधकारमय हो सकता है। कोर्ट ने मायावती के वकील से स्पष्ट कहा कि वे अपने क्लाईंट को बता देें कि उन्हें मूर्तियों पर खर्च पैसे को सरकारी खजाने में वापस जमा कराना चाहिए। वैसे मुख्य न्यायाधीश ने यह भी कहा कि यह हमारा प्रारंभिक विचार है। मायावती की ओर से वकील के रूप में सतीश मिश्रा ने कोर्ट में पक्ष रखा। उन्होंने कोर्ट से विनती की कि इस मामले की सुनवाई अब मई के बाद की जाए। लेकिन, मुख्य न्यायाधीश ने उनके इस आग्रह को ठुकरा दिया। उनके इस आग्रह पर कोर्ट ने कहा कि हमें कुछ और कहने के लिए मजबूर न करें। अब इस मामले में 2 अप्रैल 2019 को सुनवाई होगी। सुप्रीम कोर्ट इस मामले के दूसरे पक्ष पर भी सुनवाई कर रहा है। यह पक्ष है बहुजन समाज पार्टी के चुनाव चिह्न वाली मूर्तिर्योंं के निर्माण पर हुए खर्च का। याचिकाकर्ता रविकांत ने मायावती और बीएसपी के चुनाव चिह्न वाली मूर्तिर्यों के निर्माण पर सरकारी खजाने से हुए खर्च को शिकायत का मुख्य बिंदु बनाया है। उन्होंने 2009 में ही सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल कर मूर्ति निर्माण पर हुए करोड़ों के खर्च को बीएसपी से वसूलने की मांग की थी। लगभग दस वर्ष बाद इस मामले पर सुनवाई शुरू हुई है।