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नहीं रहे जेपी सेनानी हरिशंकर शर्मा

पटना : आपातकाल विरोधी आंदोलन में प्रखर भूमिका निभाने वाले प्रखर समाजसेवी एवं विश्व संवाद केन्द्र के संस्थापक न्यासी हरिशंकर शर्मा नहीं रहे। कल रात्रि 02 बजे के करीब उन्होंने अंतिम सांस पटना स्थित पारस अस्पताल में ली। हरिशंकर शर्मा लंबे समय से बीमार चल रहे थे। स्वर्गीय शर्मा मधुमेह और किडनी रोग से ग्रसित थे। आज उनका अंतिम संस्कार पटना के खाजेंकला घाट पर संपन्न हो गया। मुखाग्नि ज्येष्ठ पुत्र अभिषेक शर्मा ने दी। हरिशंकर शर्मा अपने पीछे दो पुत्र, दो पुत्री समेत भरा-पूरा परिवार छोड़ गये हैं। मूलतः मथुरा के रहने वाले हरिशंकर जी का परिवार लंबे समय से पटना में ही रह रहा है।
हरिशंकर शर्मा का जन्म 1945 में पटना में हुआ था। आपके पिताजी पंडित नरोत्तम शर्मा एक प्रख्यात कर्मकांडी और ज्योतिषी थे। आपके नानाजी पंडित भोलानाथ पाठक बेतिया राज घराने में पखावज के उस्ताद माने जाते थे। पंडित मदन मोहन मालवीय के अनन्य सहयोगी के रूप में उनकी गिनती होती थी। हरिशंकर शर्मा बाल्य काल से ही संघ के स्वयंसेवक थे। आपातकाल की घोषणा के कुछ माह पूर्व ही आपका विवाह हुआ था। लोकतंत्र को खतरे में देख हरिशंकर शर्मा ने अपने नूतन गृहस्थ आश्रम को छोड़कर जेल जाने का निर्णय किया। फुलवारी जेल में 19 माह बिताया। आपातकाल की समाप्ति के बाद जेल से बाहर आये लेकिन, जेल में ही आपको मधुमेह की बीमारी हो गई थी। बिहार में आपातकाल के बाद जब जनता पार्टी की सरकार बनी तो आपको बिहार राज्य खादी ग्राम उद्योग आयोग का अध्यक्ष बनाया गया। भारतीय जनता पार्टी की स्थापना काल से ही आप पार्टी में सक्रिय रहे। कैलाश जी के साथ मिलकर भारतीय जनता पार्टी की नींव मजबूत की। बिहार राज्य भारतीय जनता पार्टी के विभिन्न पदों पर आसीन रहे। तीन वर्ष तक बिहार प्रदेश भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष सह कार्यालय प्रभारी रहे। समाज में जहां भी रचनात्मक कार्य होता वहां आप अविलंब सक्रिय हो जाते। पटना जंक्शन स्थित महावीर मंदिर जीर्णोद्धार में भी आपने सक्रिय भूमिका निभाई। विश्व संवाद केन्द्र के संस्थापक न्यासी के तौर पर भी आपने कार्य किया।

हरिशंकर शर्मा की स्मृति में विश्व संवाद केन्द्र सभागार में एक सभा का आयोजन किया गया

उनकी स्मृति में मंगलवार को विश्व संवाद केन्द्र सभागार में एक सभा का आयोजन किया गया। उपस्थित प्रबुद्ध जनों ने आपके व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डाला। पुष्पार्चन करने वालों में विसंके न्यास के अध्यक्ष श्रीप्रकाश नारायण सिंह उपाख्य छोटे बाबू, संस्था के सचिव सह दीघा के विधायक डाॅ. संजीव चैरसिया, डाॅ. विनायक पद्माकर, मगध स्टाॅक एक्सचेंज के पूर्व अध्यक्ष सुरेश रूंगटा, यशवंत सिंह इत्यादि शामिल थे।