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लोकमानस में श्रीराम की प्रतिष्ठा से होगा समाज का कल्याण

सारण : राम व्यक्ति को नहीं वृत्ति को प्राप्त हुई संज्ञा है, श्रीराम केवल एक व्यक्ति ही नहीं, अपितु भारतीय जीवन मूल्यों के आदर्श का भी नाम है। पूज्य सन्तों ने उपासना के विविध पद्धतियों से जन-जन के मन में श्रीराम के प्रेम की स्थापना की, क्योंकि जिनके मन में श्रीराम बसते हैं, उनका जीवन सबके लिए मंगलकारी हो जाता है। ये बातें आचार्य श्री मिथिलेशनन्दिनीशरण जी ने रसिक शिरोमणि मंदिर में त्रिदिवसीय कथा के तीसरे दिन कहीं।

सारण जिले के चिरांद में आयोजित इस कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे महंत मैथिलीरमणशरण जी महाराज ने कहा कि जीवन में सत्संग अत्यन्त दुर्लभ और महत्त्वपूर्ण है। सत्संग से ही व्यक्ति का सर्वविध कल्याण होता है। त्रिदिवसीय कथा सत्र के बाद नौ फ़रवरी को प्रातः नौ बजे से ‘श्री रामार्चा महायज्ञ’ का आयोजन है। अनेक तीर्थों से पधारे सन्त महंत और भक्तों के बीच चिरांद ग्राम का वातावरण भक्तिमय हो रहा है। ऐतिहासिक पौराणिक महत्त्व का केंद्र चिरांद उपासना के भी प्राचीन केंद्र के रूप में जाना जाता है।

आयोजन का विश्राम 10 फ़रवरी को होने वाले भण्डारे के साथ होगा। उपस्थित भक्तों में रघुनाथ सिंह, राशेश्वर सिंह राजकिशोर सिंह, डॉ. शम्भूनाथ तिवारी, आरपी सिंह, विजय राय गिरजन पासवान मोहन पासवान, भरथ पासवान सुरेंद्र पासवान, जमादार पासवान हरेंद्र साह,उदय चौधरी,नवल माझी छोटे लाल पासवान लालभगवान, बंगाली मांझी।