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28 अप्रैल : नवादा की मुख्य खबरें

उत्पाद अधीक्षक के सामने से शराब से भरी ट्रक व एक कार हुआ फरार

– वाहन जांच करने वाले उत्पाद आरक्षी पर बरसे उत्पाद अधीक्षक

नवादा : जिले के बिहार-झारखंड सीमा पर रजौली थाना क्षेत्र के समेकित जांच चौकी पर पर मंगलवार को उत्पाद पुलिस अधीक्षक अनिल प्रसाद आजाद की मौजूदगी में दो अबैध शराब से लदे वाहन फरार हो गया। उत्पाद अधीक्षक के समक्ष जांच टीम डंटा पटकते रह गया और गिट्टी लोड शराब की जांच कराये बगैर ट्रक समेत छोटी कार फरार हो गया।

फरार होने के बाद उत्पाद अधीक्षक जांच-पड़ताल में लगे आरक्षी व होमगार्ड जवानों को डांट फटकार लगायी।इस दौरान मिडिया कर्मियों के द्वारा फोटो विडियो लेने पर भी भड़क गए और कहा कि हम अपने विभाग के लोगों को डांट फटकार कर रहे हैं तो आपलोग फोटो क्यों खींच रहे हैं, जाइए यहां से न्यूज नहीं मिलेगा आपलोगों को। गौरतलब हो कि जिलाधिकारी यशपाल मीणा के निर्देश पर बड़ी मालवाहक वाहनों की जांच शुरू की गई है।साथ ही नवादा में जबसे जहरीले शराब पीने से सिलसिलेवार 15 लोगों की मौत हुई तब से जांच चौकी पर थोड़ी सख्ती उत्पाद टीम के द्वारा किया जाने लगा।

इसी क्रम में मंगलवार को जांच देखकर झारखंड की ओर से आने वाली ट्रक वापस झारखंड की ओर मुड़कर भाग गई तो दूसरी ओर छोटी वाहन जांच के दौरान भागते ट्रक को देख वह भी नवादा की ओर बगैर जांच के निकल गया।जिसके बाद से लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है कि जब उत्पाद अधीक्षक के सामने से गाड़ी बगैर जांच कराये भाग सकती है तो जांच-पड़ताल कर रहे टीम के बीच कितनी गाड़ी ऐसे हीं निकल जाती होगी।

इस दौरान जांच टीम का नेतृत्व कर रहे एसआई राजेश कुमार सिन्हा के साथ उत्पाद सिपाही व होमगार्ड के जवान मौजूद थे। बता दें समेकित जांच केन्द्र पर यह कोई नई बात नहीं है। उत्पाद व पुलिस प्रशासन की मिलीभगत से शराब माफिया का खेल यहां जमकर हो रहा है। ऐसे में शराबबंदी पर अंकुश लगाना मुश्किल है। आवश्यकता सीबीआई जांच की है।

10 वर्षों से फरार दो आरोपी गिरफ्तार

नवादा : जिले के उग्रवाद प्रभावित रजौली थाना क्षेत्र के धमनी पंचायत की कुम्हरुआ गांव से दस वर्षों से फरार आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार किया। थानाध्यक्ष सह प्रशिक्षु डीएसपी ने बताया कि लगभग दस वर्ष पुराने केस में फरार चल रहे आरोपी को थाने में पदस्थापित एसआई गणेश प्रसाद मण्डल ने गुप्त सूचना के आलोक में आरोपी के घर मे छापेमारी कर गिरफ्तार कर लिया ।गिरफ्तार दोनों युवक तिलक यादव एवं विशो यादव कुम्हरुआ गांव निवासी शनिचर यादव के पुत्र है।थानाध्यक्ष ने बताया कि गिरफ्तार दोनों आरोपी को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया।

पैसे के लालच में पूर्व मुखिया का पुत्र बना अपहर्ता, बिजनेस पार्टनर काे ही कर लिया अगवा

नवादा : बिजनेश पार्टनर ने ही रुपये के लालच में युवक को अगवा कर लिया। लेकिन उसकी चाल कामयाब नहीं हो सकी। पुलिस ने अपहर्ता बने पार्टनर को गिरफ्तार कर लिया। मंगलवार को अपहत की सकुशल बरामदगी हो गई है। दोस्ती में दगा का यह वाक्या नवादा जिले के है।

बताया जाता है कि जिले के रोह थाना क्षेत्र के रूस्तमपुर गांव निवासी व सम्हरीगढ पंचायत की पूर्व मुखिया राजेंद्र प्रसाद का पुत्र रविशंकर कुशवाहा नवादा नगर के हरिश्चन्द्र स्टेडियम के समीप एक क्लीनिक चलाता था। क्लीनिक में नालंदा जिले के मानपुर- गोनावां गांव का राजीव रंजन पार्टनर था। राजीव एक फाइनेंस कंपनी से भी जुड़ा था। क्लीनिक में ज्यादा लागत राजीव का ही लगा था।

राजीव की तरक्की रवि शंकर को खटकने लगी और उसने अपने अपराधी साथियों के सहयोग से उसे अगवा कर पांच लाख रुपये फिरौती की मांग की। अपहृत राजीव के पिता रविन्द्र प्रसाद ने नालंदा जिला के पावापुरी थाने मे इसकी शिकायत दर्ज करा दी। पुलिस अनुसंधान शुरू की और पार्टनर रविशंकर को हिरासत में लेकर पुछताछ शुरू की। पुलिस सख्ती में रविशंकर टूट गया और उसकी निशानदेही पर पुलिस ने ससमय छापेमारी करते हुए रोह थाना क्षेत्र से अपहृत राजीव रंजन को मुक्त करा लिया।

पावापुरी थानाध्यक्ष शकुंतला कुमारी ने बताया कि दुर्गापुर गेरुआ के बीच राजीव को अगवा किया गया था। पार्टनर रवि शंकर ने पूछताछ के दौरान अपनी संलिप्तता को स्वीकार किया और उसकी निशानदेही पर अगवा को मुक्त कराया गया। अपहर्ता रवि शंकर को जेल भेज दिया गया है। रविशंकर पर पूर्व में भी प्राथमिकी दर्ज है। रोह के पूर्व बीडीओ रामपुकार यादव के खिलाफ गत साल लॉकडाउन के समय सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट किया था।
बीडीओ द्वारा रोह थाना में एक प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी।

मौत के बाद गांव में पड़ा रहा शव, 24 घंटे बाद प्रशासन ने कराया दाह संस्कार

नवादा : जिले के उग्रवाद प्रभावित कौआकोल प्रखंड के गांव में एक शव 24 घंटे तक दाह संस्कार के लिए इसलिए पड़ा रहा कि कोई ग्रामीण इसके लिए आगे नहीं आ रहे थे। ग्रामीणों को आशंका थी कि मृतक कोरोना संक्रमित थे। हालांकि स्थानीय स्तर पर की गई जांच में रिपोर्ट निगेटिव आई थी। लेकिन, ग्रामीण एतवार करने को तैयार नहीं थे। पत्नी के ऊपर शराब का मामला दर्ज था। इस कारण पत्नी व पुत्र दोनों फरार चल रहे थे।

कोरोना का खौफ लोगों में इस कदर था कि पड़ोस वाले मौत के बाद एक नजर देखने तक को तैयार नहीं थे। शव 20 घंटे से गांव के सामुदायिक भवन में पड़ा था। नाते-रिश्तेदार तक देखने नहीं पहुंचे थे। अंत में प्रशासन को आगे आना पड़ा। तब अंतिम संस्कार हो सका। मामला बीझो गांव का है।

बताया गया कि मृतक श्रवण तुरिया पिता सीताराम तुरिया का निधन हुआ था। वे मूल रुप से रुपौ ओपी क्षेत्र के भीखमपुर गांव के निवासी थे। पर ननिहाल बीझो गांव में 20 वर्षों से घर बनाकर रह रहे थे। प्रसादी तुरिया के घर उसका ननिहाल था। मृतक दूसरे प्रदेश में रहकर मजदूरी करते थे।बुखार तथा खांसी से ग्रसित होने के कारण तीन-चार दिन पूर्व साथ रहने वाले एक व्यक्ति ने घर पहुंचा दिया था। समय पर सही इलाज नहीं होने के कारण रविवार की रात असमय मौत हो गई। इसके बाद गांव में अफवाह फैल गया कि मौत कोरोना से हो गई है।

हालांकि पुत्र द्वारा दाह संस्कार का प्रयास किया गया पर किसी ने उसका साथ नहीं दिया। नतीजन पुत्र अकेले दाह संस्कार करने में सक्षम नहीं हो सका।जिसके कारण मृतक का शव गांव के सामुदायिक भवन पर पड़ा रहा। अंंततः प्रशासन ने 24 घंटे बाद शव का दाह संस्कार करवाया।

बस स्टैंड का टेंडर 37 लाख 1 हजार रुपए में, जबकि सामुदायिक शौचालय का 2 लाख 9 हजार 5 सौ रुपये संपन्न

नवादा : नगर परिषद हिसुआ बस स्टैंड का टेंडर नगर परिषद कार्यालय स्थित सभागार में टेंंडर कार्यपालक पदाधिकारी डॉ मनीष कुमार की उपस्थित में सम्पन्न हुआ।हिसुआ बस स्टैंड के टेंडर की सबसे अधिक बोली 37 लाख 1 हजार लगाई गई।

4 वीडर बोली लगाने के लिए जुटे:-

गौरतलब है कि नगर परिषद हिसुआ के बस स्टैंड व शौचालय के लिए विज्ञापन के अनुसार निर्धारित तारीख पर 4 वीडर बंदोबस्ती बोली लगाने के लिए जुटे थे। बस स्टैंड की बोली 16 लाख 42 हजार 3 सौ रुपये से शुरू हुई जो 14 राउंड तक चली। अंत में नारदीगंज डीह निवासी धनंजय कुमार ने 37 लाख 1 हजार की सबसे अधिक बोली लगा कर बस स्टैंड का टेंडर को अपने नाम कर लिया।

2 लाख 9 हजार 5 सौ में हुआ सामुदायिक शौचालय का टेंडर :-

बस स्टैंड के लिए टेंडर द्वारा पास टेंडर की राशि और 10 प्रतिशत ड्यूटी शुल्क सहित कुल 40 लाख 71 हजार 100 रुपये जमा करा दिया गया। सामुदायिक शौचालय की सबसे ऊंची बोली 2 लाख 9 हजार 5 सौ रुपये लगी, जिसे पूर्व के टेंडर हिसुआ निवासी संतोष कुमार ने अपने नाम कर लिया। वहीं, संतोष से 10 प्रतिशत ड्यूटी शुल्क के साथ कुल 2 लाख 30 हजार 450 रुपये जमा करवाया गया ।

बाइक चोरी की वारदात सीसीटीवी में कैद

नवादा : नगर में बीते एक पखवाड़े से मोटरसाइकिल चोर गिरोह सक्रिय हैं। गिरोह के गुर्गे दिन दहाड़े लोगों की बाइक उड़ा ले जा रहे हैं। पुलिस बाइक चोरों को पकडऩे में नाकाम साबित हो रही है। बढ़ती बाइक चोरी की घटना से लोगों में दहशत फैल रही है।

शहर के गोपाल नगर निवासी विजय कुमार ने बताया कि अपनी बाइक से स्टेट बैंक की मुख्य शाखा में बैंक काम से गया था। बैंक के बाहर अपनी बाइक BR – 27 E – 4633 हौंडा कंपनी की यूनिकॉन बाइक लगा कर बैंक के अंदर गया। बैंक का काम खत्म कर अपनी बाइक के नजदीक पहुँचा तो मेरी बाइक वहाँ नही लगी थी। बैंक में लगे सीसीटीवी को देखा तो एक युवक मेरी बाइक को दिनदहाड़े लेकर चंपत होता पाया गया। हताश पीड़ित ने घटना की लिखित सूचना नगर थाना की पुलिस को दिया है । बावजूद पुलिस मामले से पर्दा उठा भी सकेगी इसमें संदेह है।

सैप जवान की मौत के बाद थाना में पसरा सन्नाटा

नवादा : मंगलवार को सिरदला थाना में कार्यरत सैप जवान उपेन्द्र सिंह की मौत सिरदला प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में कोरॉना का दूसरे डोज लेने के बाद अस्पताल हो गया।

थानाध्यक्ष आशीष कुमार मिश्रा ने अस्पताल पहुंचकर शव को कब्जे में ले नवादा सदर अस्पताल में शव का पोस्टमार्टम कराकर शव परिजनों को सौंप दिया। बता दे मृतक जवान की पत्नी की मौत दो वर्ष पूर्व हो गई थी। वृद्ध मां, दो पुत्र, एक पुत्र बधू को वे अपने पीछे छोड़ गए हैं। घटना से मर्माहत सिरदला थाना में कार्यरत सभी कर्मियों में उदासी छा गई है।

बुधवार को सिरदला परिसर के मुख्य द्वार पर हथकड़ी वाली ताले लगाकर कोरोना चैन को तोड़ने के लिए थाना में प्रवेश करने से वर्जित कर दिया गया। हालांकि थानाध्यक्ष आशीष कुमार कुछ कहने को तैयार नहीं है। फिर भी जिस तरह से सिरदला प्रखंड के कुशाहन, बिलारपुर और लौंद के ग्रामीण क्षेत्र में संक्रमण कि तादात बढ़ रही है इससे सुरक्षित रहने के लिए सरकारी महकमे के अधिकारी कर्मचारी के साथ आम ग्रामीण को सतर्क रहना जरूरी है।

थाना परिसर में पसरा सन्नाटा और मुख्य द्वार में लगा ताला ही यह बयान कर रही है कि सिरदला प्रखंड क्षेत्र में स्वास्थ्य व्यवस्था काफी लचर स्थिति में चल रही है। सिरदला प्राथमिक स्वस्थ्य केंद्र का आलम है कि जितना समय अस्पताल में भर्ती होने में लगता है उससे भी कई गुना कम समय में मरीज को रेफर कर दिया जाता है। चुकी सिरदला प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में पारासिटामोल के सिवाय कोई बेहतर व्यवस्था नहीं है। ग्रामीण क्षेत्र के गांवों में ग्रामीण चिकित्सक नहीं होते तो शायद सिरदला सरकारी अस्पताल के भरोसे दो लाख की आबादी संभलना संभव नहीं हो पाता।