SIMI का प्रॉक्सी फ्रंट है हिजाब विवाद वाली लड़कियों का संगठन, BAN से बचने को खड़ा किया तूफान
नयी दिल्ली : कर्नाटक से उठे हिजाब विवाद ने पूरे भारत में जबर्दस्त तूफान खड़ा कर दिया है। इसमें पक्ष विपक्ष के नेताओं की इंट्री से माहौल और खराब हो चला है। लालू यादव ने तो यहां तक कह डाला कि हिजाब के विरोध से देश में गृह युद्ध छिड़ जाएगा। वहीं दूसरा पक्ष स्कूलों—कॉलेजों को मदरसा नहीं बनने देने के तर्क दे रहा। सवाल यह है कि भारत में क्या सही है? स्कूल कॉलेजों में ड्रेस कोड वाली धर्म निरपेक्षता या धार्मिक प्रतीकों की मनमानी नुमाइश वाला हिजाब? क्या हमने अफगानिस्तान वाले दृश्यों को इतनी जल्दी भुला दिया।
इस्लामिक देशों में बैन है हिजाब
अभी दो—चार माह पहले हमने टीवी पर देखा कि कैसे लोग अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद वहां से निकलने के लिए विमान के पहियों से लटक कर भाग रहे हैं। गौर से सोचें और अपने आप से पूछें कि अफगानिस्तान जो एक मुस्लिम देश है और जहां शरिया भी लागू था, वहां से लोग इस तरह क्यों भाग रहे थे। दुनिया में कई ऐसे मुस्लिम देश हैं जहां हिजाब पहनने या पूरा चेहरा ढंकने पर कई तरह के प्रतिबंध हैं। इनमें सीरिया और मिस्र प्रमुख मुस्लिम देश हैं। वहीं यूरोपीय देश सुरक्षा कारणों से इस श्रेणी में शामिल हैं।
यहां जानें पड़ताल की एक-एक बात
अब बात करते हैं कि क्या भारत में हिजाब की आग लगाना कोई सोची समझी साजिश है। पड़ताल करने पर पता चला कि सारे मामले की शुरुआत कर्नाटक के उडुपी में एक सरकारी कॉलेज की कुछ छात्राओं के एक ग्रुप द्वारा की गई। इस ग्रुप की छात्राएं ‘कैंपस फ्रंट आफ इंडिया’ नाम के एक संगठन से जुड़ी हैं। यह संगठन 2006 में बने मुस्लिम संगठन ‘पॉपुलर फ्रंट आफ इंडिया’ यानी पीएफआई से संबद्ध है। छात्राओं का संगठन पीएफआई का स्टूडेंट विंग है। पीएफआई का बेस केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु में है। अतिवादी गतिविधयों के कारण भारत सरकार पीएफआई को बैन करने की प्रक्रिया में है। पीएफआई को प्रतिबंधित इस्लामिक संगठन सिमी का प्रॉक्सी फ्रंट माना जाता है।
प्रतिबंधित गतिविधियों से एजेंसियां हैरान
कई राज्यों से भी इसकी गतिविधियों के बारे में चौंकाने वाली रिपोर्ट मिली हैं। छात्राओं के इस संगठन के बारे में भी इंटेलिजेंस की रिपोर्ट है कि ये प्रतिबंधित हरकतों में संलग्न है और इसपर भी बैन की तैयारी ऐजेंसियां कर रही हैं। ऐसे में यह साफ हो जाता है कि हिजाब विवाद के पीछे असल मकसद क्या है। लेकिन यहीं जब इस राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामले में राजनीति की मिलावट करने प्रियंका गांधी, लालू यादव और ओवैसी सरीखे नेता बयानबाजी करने पर उतर जाते हैं इनका असल मकसद भी सवालों के घेरे में आ जाता है। क्या वोट की राजनीति इतनी जरूरी है कि आपका अपना घर ही दांव पर लग जाए?
नेताओं ने विवाद में की राजनीति की मिलावट
दूसरी तरफ हिजाब के मुकाबले भगवा स्कार्फ लगाकर शिक्षण संस्थानों में विरोध दर्ज कराना भी मध्ययुगीन तरीका ही है जहां हाथ के बदले हाथ और सिर के बदले सिर काट लेने वाला कानून प्रचलन में था। बहरहाल कोर्ट ने मामले में बेहतर रूख अपनाते हुए इसे बड़े पीठ के पास भेजकर समझदारी का काम किया है। देखना है कि हमारे नेताओं को कब सदबुद्धि आती है।